Gold Silver Price Today: पिछले कई महीनों से सोने-चांदी ने आम लोगों के साथ-साथ निवेशकों की धड़कनें बढ़ा रखी है. हद तो तब हुई जब सोने-चांदी लगातार नए रिकॉर्ड्स बनाने लगे. लेकिन सोने-चांदी में जोरदार तेजी के बाद अब उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. बीते एक हफ्ते से देखे तो सोने और चांदी की कीमतें एक दायरे में ही झूल रही है. सोमवार को IBJA पर सोने का भाव 1,54,098 प्रति 10 ग्राम तो चांदी 240947 प्रति किलो रहा. अब ऐसे में निवेशकों को लग रहा है क्या सोने और चांदी में रैली खत्म हो गई है या सोने और चांदी में अभी और दम बाकी है? आइए विस्तार से जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी.
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क्या खत्म हो गई सोने और चांदी में रैली?
सोने ने हाल के महीनों में मजबूत रैली दिखाई है, जबकि चांदी में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और कई बार तेज गिरावट भी देखी गई है. ऐसे माहौल में दुनिया की बड़ी इन्वेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs का बयान सामने आया है. Goldman Sachs का कहना है कि सोने की मौजूदा तेजी किसी बड़े कमोडिटी सुपरसाइकिल की शुरुआत नहीं है, यानी ये मान लेना कि अब कई सालों तक सभी कमोडिट तेल, तांबा, स्टील, एग्री कमोडिटी सब में लंबी तेजी आएगी, अभी जल्दबाजी होगी. साथ ही बैंक ने ये भी कहा है कि चांदी में हाल की गिरावट का एक बड़ा कारण लिक्विडिटी स्क्वीज और ट्रेडिंग फ्लो है, जिसकी वजह से वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव बढ़ा है.
कमोडिटी सुपरसाइकिल शब्द का मतलब क्या है?
जब कई सालों तक कच्चे माल और कमोडिटी की कीमतों में लगातार और व्यापक तेजी रहती है जैसे तेल, मेटल्स, कृषि उत्पाद तो उसे सुपरसाइकिल कहा जाता है. इतिहास में ऐसा तब हुआ जब चीन में तेज इंडस्ट्रियल ग्रोथ हुई, ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ा, सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा रही. उस दौरान सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि ज्यादातर कमोडिटी में लंबी तेजी देखी गई. लेकिन Goldman Sachs का कहना है कि अभी जो सोने में तेजी है, वो पूरे कमोडिटी सेक्टर की कहानी नहीं है. ये ज्यादा गोल्ड-स्पेसिफिक यानी सोने से जुड़ी वजहों से हो रही है.
सोने में उछाल के पीछे की वजह?
सोने में तेज उछाल के पीछे 4 अहम फैक्टर रहे हैं, जिसमें जियो पॉलिटिकल टेंशन पहला है. जब-जब दुनिया में युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या आर्थिक संकट की स्थिति में निवेशकों ने सोने में निवेश किया. इसके अलावा कई देशों के केंद्रीय बैंक डॉलर रिजर्व के साथ-साथ सोना भी जमा कर रहे हैं, इससे डिमांड बढ़ी है. साथ ही ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों ने भी सोने की तेजी को बढ़ाया है. जब बाजार को लगता है कि ब्याज दरें स्थिर रहेंगी या घटेंगी, तो सोना आकर्षक बन जाता है क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता, लेकिन उसकी कीमत बढ़ सकती है. डॉलर में कमजोरी भी एक फैक्टर है क्योंकि अगर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है तो सोना आमतौर पर मजबूत होता है, क्योंकि गोल्ड की कीमत डॉलर में तय होती है.
Goldman Sachs का क्या है मानना?
Goldman का कहना है कि ये पूरे कमोडिटी सेक्टर का बूम नहीं है. Goldman Sachs साफ कहता है कि सोने की हालिया रैली को देखकर ये मान लेना कि अब पूरा कमोडिटी सेक्टर कई सालों की तेजी में जाएगा, सही नहीं है. यानी सोने में एक सेलेक्टिव रैली है, सभी कमोडिटी एक साथ नहीं भाग रहीं, डिमांड-सप्लाई की लंबी संरचनात्मक कहानी अभी नहीं बनी, इसका मतलब निवेशकों को सावधान रहना चाहिए.
सिर्फ इसलिए कि सोना चढ़ा है, ये जरूरी नहीं कि बाकी मेटल्स या कमोडिटी भी लंबे समय तक उसी दिशा में जाएं. Goldman Sachs के मुताबिक चांदी में हाल की गिरावट का बड़ा कारण लिक्विडिटी स्क्वीज है. लिक्विडिटी स्क्वीज का मतलब है जब बाजार में नकदी कम हो जाती है या बड़े खिलाड़ी अचानक पोजिशन काटते हैं, तो कीमतों में तेज और अनियंत्रित मूवमेंट आता है. चांदी का बाजार सोने की तुलना में छोटा है. इसलिए थोड़ी सी बड़ी बिकवाली भी कीमत गिरा सकती है.
क्या सोने में निवेश सुरक्षित?
Goldman Sachs का कहना है कि अभी उनका फोकस गोल्ड की वैल्यूएशन पर है. वैल्यूएशन का मतलब है क्या मौजूदा दाम उचित हैं या बहुत ज्यादा? अगर सोना बहुत महंगा हो जाए तो नई खरीद कम हो सकती है, प्रॉफिट बुकिंग बढ़ सकती है लेकिन अगर दाम उचित स्तर पर हों, तो निवेशकों के लिए आकर्षक बने रह सकते हैं.
Goldman Sachs ये नहीं कह रहा कि सोना खराब निवेश है. वे सिर्फ ये कह रहे हैं कि इसे सुपरसाइकिल समझना जल्दबाजी होगी. लंबी अवधि में गोल्ड पोर्टफोलियो में हेज की तरह काम करता है जोखिम कम करने में मदद करता है, आर्थिक अनिश्चितता में सहारा देता है लेकिन हर तेजी एक जैसी नहीं होती. यानी सोना अभी भी सुरक्षित निवेश का प्रतीक है, लेकिन हर तेजी को लंबी सुपरस्टोरी मान लेना सही नहीं होगा.
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