सोने-चांदी की कीमतों में जारी पिछले कई महीनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. इन धातुओं के बदलते भाव ने ना केवल निवेशक बल्कि आम लोगों की धड़कनें बढ़ा रखी है और मार्केट में भी उथल-पुथल जारी है. इसी बीच सोने की कीमतों को लेकर दुनिया की बड़ी निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली(Morgan Stanley) ने एक बड़ी रिपोर्ट जारी कर दी है. इस रिपोर्ट में साल 2026 में सोने की कीमतें क्या रहने वाली है इसको लेकर एक चेतावनी दी गई है, जिसके बाद हलचल तेज हो गई है. सोना-चांदी के इस खास एपिसोड में आइए जानते हैं कि सोने की कीमतें अभी क्या हैं और मॉर्गन स्टेनली का क्या कहना है.
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सोने-चांदी के भाव!
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट से पहले जानिए सोने चांदी का क्या है भाव. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 23 जून शाम करीब 7 बजे 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 1955 रुपये की गिरावट के साथ 1,46,163 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 7260 रुपये की गिरावट के साथ 2,27,050 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी.
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में क्या है?
मॉर्गन स्टेनली ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें कहा गया है कि अगर गोल्ड ETF में निवेश दोबारा तेजी से नहीं बढ़ता, तो साल 2026 में सोने का भाव 5,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचना काफी मुश्किल हो सकता है. बैंक के कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों को ऊपर ले जाने के लिए सिर्फ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी काफी नहीं होगी. सोने को 5,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर ETF निवेश की भी जरूरत पड़ेगी.
क्या होता है ETF?
अब सवा आता है कि आखिर ETF क्या होता है? तो ETF यानी Exchange Traded Fund. यह एक ऐसा निवेश माध्यम है जिसके जरिए लोग बिना फिजिकल सोना खरीदे सोने में निवेश कर सकते हैं. जब ETF में पैसा आता है तो सोने की मांग बढ़ती है और कीमतों को सहारा मिलता है. लेकिन जब ETF से पैसा निकलता है तो सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है.
Morgan Stanley के विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल सोने की सबसे बड़ी कमजोरी ETF की मांग है. उन्होंने कहा कि ETF निवेशकों के फैसले मुख्य रूप से अमेरिका के ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और वास्तविक ब्याज दरों यानी Real Yields पर निर्भर करते हैं.
क्यों बढ़ रहा सोने पर दबाव?
हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व यानी अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने अपने रुख में सख्ती दिखाई है. बाजार को पहले उम्मीद थी कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती होगी, लेकिन अब ऐसी संभावना कमजोर होती दिखाई दे रही है. कुछ निवेशक तो यह भी मानने लगे हैं कि जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ भी सकती हैं. यही कारण है कि सोने पर दबाव बढ़ रहा है.
जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो निवेशकों को बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प ज्यादा आकर्षक लगते हैं. दूसरी तरफ सोना कोई ब्याज नहीं देता. इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोने में निवेश कम हो सकता है. Morgan Stanley के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की 10 साल की वास्तविक बॉन्ड यील्ड फरवरी के मुकाबले काफी ऊपर चली गई है. इसके चलते गोल्ड ETF से पैसा निकलना शुरू हुआ और सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली.
क्या कहते हैं Morgan Stanley के विशेषज्ञ Amy Gower?
Morgan Stanley की गोल्ड विशेषज्ञ Amy Gower को अभी भी लगता है कि लंबे समय में सोने की कीमतों में तेजी की संभावना बनी हुई है और वर्ष 2026 के दौरान सोना 5,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हाल के महीनों में सोना उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है, खासकर ईरान और उससे जुड़े संघर्षों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. सामान्य तौर पर ऐसे समय में सोने की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
Amy Gower का कहना है कि ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई. तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ. महंगाई बढ़ने के कारण अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहा है. यानी इस बार भू-राजनीतिक तनाव से ज्यादा असर मौद्रिक नीति यानी Monetary Policy का पड़ा है. उन्होंने कहा कि आज सोने की कीमतें सिर्फ घटनाओं पर नहीं बल्कि उन घटनाओं के बाद केंद्रीय बैंक क्या कदम उठाते हैं, इस पर ज्यादा निर्भर हैं.
Amy Gower ने दी चेतावनी!
Morgan Stanley का मानना है कि अगर भविष्य में ब्याज दरों में कटौती होती है तो इसका फायदा सोने को मिल सकता है. मई महीने में बैंक का अनुमान था कि अमेरिका में जनवरी 2027 में एक ब्याज दर कटौती हो सकती है और इसके बाद मार्च 2027 में दूसरी कटौती हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो ETF निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है. लेकिन दूसरी तरफ जोखिम भी मौजूद हैं.
Amy Gower ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान से जुड़ा संघर्ष लंबा चलता है और बाजार यह मानने लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहेंगी या फिर बढ़ सकती हैं, तो सोने की कीमतों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि संघर्ष का समाधान हो जाता है तो भी सोने की कीमतों में बहुत बड़ी तेजी आना आसान नहीं होगा, क्योंकि पहले से ही ऊंचे दामों के कारण ETF निवेशक, केंद्रीय बैंक और आम उपभोक्ता खरीदारी सीमित कर सकते हैं.
कुल मिलाकर इस पूरी रिपोर्ट का निष्कर्ष ये है कि Morgan Stanley अभी भी लंबे समय के लिए सोने को लेकर पॉजिटिव है, लेकिन 5,200 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य हासिल करने के लिए ETF निवेश का वापस आना बेहद जरूरी होगा. अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं और ETF में पैसा नहीं आता, तो सोने की कीमतों के लिए उस लक्ष्य तक पहुंचना काफी मुश्किल हो सकता है.
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