Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. 10 फरवरी को MCX एक्सचेंज पर दोनों धातुएं गिरावट के साथ खुलीं. बाजार खुलते ही अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 800 रुपये से ज्यादा गिर गया. वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी भी 3000 रुपये से ज्यादा लुढ़क गई. कुछ देर तक सोने चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहा. बाद में चांदी 5000 रुपये से ज्यादा गिर गई. हालांकि सोना कुछ संभला लेकिन दोपहर में गिरावट 1000 रुपये से ज्यादा हो गई. इसी बीच मशहूर किताब रिच डैड पुअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बड़ा दावा किया है, जिससे की मार्केट में फिर एक बार ऊहापोह की स्थिति बन गई है. सोना-चांदी के इस खास एपिसोड में आइए विस्तार जानते हैं क्या है सोने-चांदी के ताजा भाव और रॉबर्ट कियोसाकी की भविष्यवाणी.
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सोने-चांदी के भाव का क्या है हाल?
9 फरवरी को MCX एक्सचेंज पर सोना 328 रुपये की बढ़त के साथ प्रति 10 ग्राम 1,58,394 रुपये पर बंद हुआ था. जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 125 रुपये की तेजी के साथ 2,62,745 रुपये पर बंद हुई थी. दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को चांदी की कीमतें 6 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 2.72 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थीं, जबकि सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया था.
वहीं 10 फरवरी को MCX एक्सचेंज पर शाम 7 बजे 2 अप्रैल 2026 की डिलीवरी वाला सोना गिरावट के साथ 1,57,700 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. जबकि 5 मार्च 2026 की डिलीवरी वाली चांदी करीब 3 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 2,59,300 रुपये पर ट्रेड कर रही थी.
रॉबर्ट कियोसाकी ने अब क्या कि भविष्यवाणी?
रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बड़ा दावा किया है कि साल 2026 तक चांदी की कीमत 200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. यानी आज के मुकाबले लगभग दोगुनी कीमत. लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में ऐसा हो सकता है या यह सिर्फ एक बड़ा अनुमान है.
इसस जानने के लिए यह समझना जरूरी है कि कियोसाकी ने ऐसा क्यों कहा? तो उनका कहना है कि चांदी हजारों साल से पैसा यानी मनी के रूप में इस्तेमाल होती रही है. लेकिन आज की दुनिया में इसकी भूमिका और बड़ी हो गई है. अब ये सिर्फ निवेश की धातु नहीं रही बल्कि टेक्नोलॉजी की रीढ़ बन चुकी है. मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, चिप्स और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर में चांदी की भारी जरूरत है. इसलिए उनका मानना है कि आने वाले समय में इसकी मांग तेजी से बढ़ेगी और कीमत भी उछल सकती है.
कियोसाकी ने यह भी बताया कि साल 1990 में चांदी की कीमत सिर्फ करीब 5 डॉलर प्रति औंस थी और आज यह 90 से 95 डॉलर के आसपास पहुंच चुकी है. यानी तीन दशकों में कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है. उनका कहना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो 200 डॉलर का स्तर असंभव नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि उनका अनुमान गलत भी हो सकता है, लेकिन वे लंबे समय के लिए चांदी को मजबूत निवेश मानते हैं.
अचानक कमजोरी भी हुई थी चांदी
लेकिन कहानी का दूसरा डराने वाला हिस्सा भी है. हाल ही में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट भी देखी गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद चांदी थोड़ी कमजोर हुई और कई जगह ETF और फ्यूचर्स में बड़ी गिरावट आई. इसका कारण भू-राजनीतिक तनाव का थोड़ा कम होना बताया जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य कार्रवाई से इनकार किया और यूरोप के साथ संभावित व्यापार समझौते के संकेत दिए. जैसे ही तनाव कम हुआ, सुरक्षित निवेश यानी गोल्ड और सिल्वर में तेजी थोड़ी ठंडी पड़ गई.
यही वजह है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. एक तरफ बड़े निवेशक और विश्लेषक कह रहे हैं कि लंबी अवधि में चांदी की कीमतें बहुत ऊपर जा सकती हैं. दूसरी तरफ छोटी अवधि में अचानक गिरावट भी आ सकती है, जिससे छोटे निवेशकों को बड़ा नुकसान हो सकता है. कियोसाकी खुद भी चेतावनी देते हैं कि लालच में आकर शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशक अक्सर नुकसान उठाते हैं. उनका मशहूर वाक्य है कि धीरे और समझदारी से निवेश करने वाले लोग मोटे होते हैं, लेकिन लालच में दौड़ने वाले लोग कट जाते हैं.
निवेशक क्या करें?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निवेशकों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में संभावनाएं जरूर हैं क्योंकि इसकी औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है और कई सेक्टर इसके बिना चल ही नहीं सकते. लेकिन साथ ही इसकी कीमतें बहुत ज्यादा अस्थिर भी रहती हैं. इसलिए पूरा पैसा एक साथ लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
कुल मिलाकर तस्वीर साफ है कि चांदी का भविष्य चमकदार दिख रहा है, लेकिन रास्ता बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है. अगर कियोसाकी का अनुमान सही साबित हुआ तो कीमतें कई गुना बढ़ सकती हैं. लेकिन अगर बाजार में अचानक गिरावट आई तो वही चांदी निवेशकों के लिए बड़ा झटका भी बन सकती है. इसलिए निवेश करने से पहले जोखिम को समझना और लंबी अवधि की रणनीति बनाना बेहद जरूरी है.
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