Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की चमक अभी फीकी पड़ती नहीं दिख रही है. कारोबारी हफ्ते के पहले दिन फिर से सोने और चांदी में तेज खरीदारी देखने को मिली. जियो पॉलिटिकल टेंशन, डॉलर की चाल और निवेशकों की बढ़ती सुरक्षित निवेश की मांग के बीच MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिली है. इसी बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS ने सोने को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है, जिसके बाद मानिए बाजार में भूचाल सा आ गया है. सोना-चांदी के इस खास एपिसोड में आज जानिए पूरी बात.
ADVERTISEMENT
सोने-चांदी के भाव
23 फरवरी शाम 7 बजे तक 2 अप्रैल को डिलीवरी वाला सोना 1,59,677 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे, वहीं 5 मार्च 2026 को डिलीवरी वाली चांदी 2,64,673 प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी. इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने के दाम 5 हजार 162 डॉलर प्रति औंस को पार कर गए, वहीं चांदी भी 86 डॉलर प्रति औंस को पार कर गई. घरेलू बाजार में चांदी की तेजी सोने से भी ज्यादा रही, जिससे साफ संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा कीमती धातुओं पर और मजबूत हुआ है.
सोना और चांदी में अचानक तेजी के कारण?
सोना और चांदी में तेजी अचानक नहीं आई. इसके पीछे कई मजबूत वैश्विक कारण हैं, जो इस समय बाजार को प्रभावित कर रहे हैं.
पहला: अमेरिका-ईरान तनाव
जब भी दुनिया में युद्ध या सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ती है, तब निवेशक जोखिम वाले एसेट छोड़कर सुरक्षित विकल्पों की तरफ जाते हैं. सोना सदियों से संकट के समय का सबसे भरोसेमंद निवेश माना जाता है. ये ही वजह है कि तनाव बढ़ते ही सोना और चांदी में खरीदारी तेज हो गई.
दूसरा: तेल की कीमतों में उछाल
तेल की कीमतों में तेजी का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. महंगा तेल मतलब महंगाई का खतरा और जब महंगाई बढ़ने की आशंका होती है, तब सोना एक हेज बनकर उभरता है.
तीसरा: अमेरिकी डॉलर की चाल और फेड की नीति
अमेरिकी डॉलर इस समय चार महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है. आमतौर पर मजबूत डॉलर सोने पर दबाव डालता है, क्योंकि सोना डॉलर में कीमत तय होता है. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है, बाजार मान रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती जारी रख सकता है. उम्मीद है कि सितंबर तक दो बार 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो सकती है. कम ब्याज दरें और कमजोर वास्तविक ब्याज दरें सोने के लिए सकारात्मक होती हैं, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता. जब बैंक जमा या बॉन्ड से कम रिटर्न मिलता है, तब निवेशक सोने की ओर झुकते हैं.
चौथा: मांग में इजाफा और सप्लाई सीमित
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक सोने और चांदी की मांग ज्यादा है और सप्लाई कम है. कुल मिलाकर इस वक्त सभी फैक्टर्स बुलियन मार्केट को सपोर्ट कर रहे हैं.
UBS की भविष्यवाणी
इस बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS ने सोने को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है. UBS का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सोना $6,200 प्रति औंस तक पहुंच सकता है. UBS के मुताबिक जियो पॉलिटिकल टेंशन कम होने वाले नहीं हैं, फेड का ढीला रुख जारी रह सकता है. केंद्रीय बैंक सोना खरीदते रहेंगे, निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. UBS ने सोने को अट्रैक्टिव बताया है और निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपने पोर्टफोलियो में mid single digit allocation तक सोने की हिस्सेदारी रख सकते हैं.
हालांकि UBS यह भी कहता है कि जियो पॉलिटिकल टेंशन हमेशा लंबे समय तक बाजार को प्रभावित नहीं करतीं, लेकिन वे अस्थायी अस्थिरता जरूर पैदा करती हैं और ऐसे समय में सोना पोर्टफोलियो हेज का काम करता है. चांदी सिर्फ कीमती धातु ही नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में इसकी भारी मांग है.
सोना-चांदी सुरक्षित ठिकाना
अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर रहती है और इंडस्ट्रियल गतिविधि मजबूत रहती है, तो चांदी को दोहरा फायदा मिलता है. सुरक्षित निवेश के रूप में, औद्योगिक मांग के कारण इसीलिए MCX पर चांदी की तेजी सोने से भी ज्यादा देखने को मिली. सोने और चांदी ने एक बार फिर दिखा दिया कि संकट के समय में सोना और चांदी क्यों सुरक्षित ठिकाना कहलाते हैं. तेल में तेजी, अमेरिका-ईरान तनाव, फेड की संभावित दर कटौती और मजबूत मांग, इन सबने मिलकर कीमती धातुओं को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. अगर UBS का अनुमान सही साबित होता है और सोना $6,200 प्रति औंस की तरफ बढ़ता है, तो यह मौजूदा स्तरों से भी बड़ी छलांग होगी.
यह खबर भी पढ़ें: फोन लेना है! 24 हजार रुपये सस्ता मिल रहा Samsung का ये दमदार समार्टफोन, अब इतनी है कीमत
ADVERTISEMENT

