सोने की कीमत में एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. तेजी के पीछे सिर्फ डॉलर या ब्याज दरें ही नहीं, बल्कि भारत के पड़ोस में हो रही एक बड़ी खरीदारी है. चीन लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में सोना जोड़ रहा है और बाजार में उसकी असल खरीद आधिकारिक आंकड़ों से भी कहीं ज्यादा होने की बात सामने आ रही है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब साढ़े तीन महीने के टॉप पर पहुंच गया है.
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खबर लिखे जाने तक 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला 1 किलो सोना 0.63 फीसदी की तेजी के साथ 1.63 लाख रुपये के पार कारोबार कर रहा था. सोने की कीमत में सिर्फ एक हफ्ते में 5.69 फीसदी की तेजी आई है, जबकि एक महीने में यह 13.10 फीसदी चढ़ चुका है. हालांकि, तीन महीने की अवधि में सोना अभी भी 0.99 फीसदी नीचे है. अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो गोल्ड फ्यूचर्स 14 मई के बाद पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया है. यानी सोने की कीमत करीब साढ़े तीन महीने के ऊपरी स्तर पर है.
IBJA (इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन) की तरफ से जारी रेट के मुताबिक 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 1 लाख 62 हजार के रेट को पार कर गया है. वहीं प्योर चांदी (999) प्रति किलो 2 लाख 45 हजार के ऊपर पहुंच चुकी है.
तेजी की बड़ी वजह क्या है ?
- इस तेजी की सबसे बड़े कारणों में से एक चीन की सोने की खरीदारी है.
- चीन पिछले कई महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है.
- जून में चीन ने लंदन के OTC बाजार के जरिए 40 टन से ज्यादा सोना खरीदा.
- यह 2025 की शुरुआत के बाद उसकी दूसरी सबसे बड़ी मासिक खरीद बताई जा रही है.
- वहीं, चीन के केंद्रीय बैंक ने जून में आधिकारिक तौर पर करीब 15 टन सोने की खरीद की जानकारी दी थी.
आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा सोने की हुई खरीदी
- OTC बाजार के जरिए हुई खरीद आधिकारिक आंकड़े से करीब 167 फीसदी ज्यादा रही.
- मई में भी चीन ने OTC बाजार के जरिए करीब 48 टन सोना खरीदा था.
- आधिकारिक आंकड़ों में करीब 10 टन की खरीद बताई गई थी.
- इस तरह सिर्फ मई और जून में चीन की OTC बाजार के जरिए सोने की खरीद करीब 88 टन रही.
जुलाई में 20 टन सोना, 2023 के बाद बड़ी मासिक खरीदारी
इसके बाद जुलाई में चीन के केंद्रीय बैंक ने आधिकारिक तौर पर 20 टन से ज्यादा सोना खरीदा. यह अक्टूबर 2023 के बाद उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद बताई जा रही है. इस साल अब तक चीन अपने आधिकारिक गोल्ड रिजर्व में 60 टन से ज्यादा सोना जोड़ चुका है और उसका कुल गोल्ड रिजर्व करीब 2,366 टन हो गया है. यानी चीन की तरफ से लगातार बढ़ती खरीदारी सोने की कीमत के लिए बड़ा सहारा बन रही है.
अब दूसरा बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आने से सोने की मांग को सपोर्ट मिलता है. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है. ऐसे में डॉलर कमजोर होने पर दूसरी करेंसी वाले खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है. इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी सोने के लिए अहम है.
आमतौर पर ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने की तुलना में ब्याज देने वाली संपत्तियां ज्यादा आकर्षक लगती हैं, लेकिन जब दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है और बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है, तो निवेशक सोने की तरफ रुख कर सकते हैं. इस समय अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की नजर आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर है. साथ ही 27 से 29 अगस्त के बीच होने वाला जैक्सन होल सम्मेलन भी बाजार के लिए अहम रहेगा, क्योंकि वहां से फेड की आगे की नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं.
अब तीसरा बड़ा कारण है जियोपॉलिटिकल तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है. ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की चेतावनी और तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है. ऐसे माहौल में सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग मिलती है. अगर जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ता है, तो गोल्ड में निवेश की मांग को और सहारा मिल सकता है. यानी इस समय सोने को एक साथ कई तरफ से सपोर्ट मिल रहा है. चीन की खरीदारी, कमजोर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव.
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सोने की यह तेजी आगे भी जारी रहेगी?
फिलहाल केंद्रीय बैंकों की खरीदारी गोल्ड के लिए एक मजबूत सहारा बनी हुई है. अगर चीन और दूसरे केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाते रहते हैं, तो सोने की कीमतों को लंबी अवधि में सपोर्ट मिल सकता है.
हालांकि, निवेशकों को अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी होगी. अगर डॉलर मजबूत होता है और बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ती है, तो सोने पर दबाव आ सकता है. इसके अलावा इतनी तेज बढ़त के बाद बाजार में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है.
भारत में रुपए की भी अहम भूमिका
भारत में घरेलू सोने की कीमत के लिए रुपया भी काफी अहम है. अगर रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत स्थिर रहने के बावजूद भारत में सोना महंगा हो सकता है. फिलहाल ऊंची कीमतों का असर खुदरा मांग पर जरूर दिखाई दे रहा है. महंगे सोने की वजह से कुछ खरीदार खरीदारी टाल रहे हैं. लेकिन निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की मांग अभी भी कीमतों को मजबूत बनाए हुए है.
तो कुल मिलाकर, सोने की मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं बल्कि कई बड़े वैश्विक फैक्टर काम कर रहे हैं. भारत में 1 किलो सोना 1.63 लाख रुपये के पार कारोबार कर रहा है और एक महीने में करीब 13 फीसदी की तेजी दर्ज कर चुका है. अब आगे सोने की दिशा काफी हद तक चीन की खरीदारी, अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेड के अगले कदम पर निर्भर करेगी. अगर ये सभी फैक्टर गोल्ड के पक्ष में बने रहते हैं, तो सोने की चमक आगे भी बरकरार रह सकती है.
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