विदेश जाने वालों को बड़ी राहत, 1 सितंबर से इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मुहर लगाने का नियम खत्म

तनीषा त्यागी

• 12:57 PM • 23 Aug 2026

1 सितंबर से विदेश जाने वालों को इमिग्रेशन पर बोर्डिंग पास पर मुहर नहीं लगवानी होगी. यात्री मोबाइल का ई-बोर्डिंग पास या प्रिंटेड पास दिखाकर आगे बढ़ सकेंगे.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

1 सितंबर से इमिग्रेशन पर बोर्डिंग पास की मुहर जरूरी नहीं रहेगी

मोबाइल में ई-बोर्डिंग पास दिखाकर भी यात्री इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे

प्रिंटेड बोर्डिंग पास मान्य रहेगा, बस उस पर मुहर नहीं लगेगी

विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 1 सितंबर से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन क्लीयरेंस के दौरान बोर्डिंग पास पर मुहर लगवाने की पुरानी अनिवार्यता खत्म हो जाएगी. यानी अब यात्रियों को इमिग्रेशन अधिकारी से अपने बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगवाने की जरूरत नहीं होगी. सबसे बड़ी बात यह है कि यात्री स्मार्टफोन में मौजूद ई-बोर्डिंग पास दिखाकर भी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. यह बदलाव उन यात्रियों के लिए राहत भरा हो सकता है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान कई तरह की कागजी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है. नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को ज्यादा आसान और सुविधाजनक बनाना है.

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1 सितंबर से बदलेगा इमिग्रेशन क्लीयरेंस का तरीका

अब तक विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पेश करना होता था और उस पर अधिकारी की मुहर लगाई जाती थी. 1 सितंबर से बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगाने की यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी. गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाले ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने इस प्रक्रिया की समीक्षा के बाद नया फैसला लिया है. इसके तहत देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों के लिए डिजिटल और प्रिंटेड, दोनों तरह के बोर्डिंग पास स्वीकार्य रहेंगे. इसका मतलब है कि अगर आपके फोन में एयरलाइन का ई-बोर्डिंग पास मौजूद है, तो आप उसे इमिग्रेशन काउंटर पर दिखा सकेंगे. इसके लिए सिर्फ मुहर लगवाने के उद्देश्य से प्रिंटेड बोर्डिंग पास रखने की अनिवार्यता नहीं रहेगी.

मोबाइल में बोर्डिंग पास दिखाकर आगे बढ़ सकेंगे यात्री

डिजिटल यात्रा सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह बदलाव यात्रियों के लिए काफी अहम माना जा सकता है. अब विदेश जाने वाले लोग अपने स्मार्टफोन में मौजूद ई-बोर्डिंग पास का इस्तेमाल कर सकेंगे. यात्रियों को अपनी सुविधा के हिसाब से विकल्प चुनने की आजादी होगी. जो लोग मोबाइल में बोर्डिंग पास रखना पसंद करते हैं, वे डिजिटल पास का इस्तेमाल कर सकेंगे. वहीं, जो यात्री कागज पर प्रिंटेड बोर्डिंग पास साथ रखना चाहते हैं, उनके लिए भी पुरानी तरह बोर्डिंग पास मान्य रहेगा. नई व्यवस्था में असली बदलाव बोर्डिंग पास के फॉर्मेट में नहीं, बल्कि उस पर लगाई जाने वाली इमिग्रेशन मुहर को लेकर है.

क्या प्रिंटेड बोर्डिंग पास अब बेकार हो जाएगा?

इस बदलाव के बाद यात्रियों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या अब एयरलाइन से मिला या खुद प्रिंट किया गया बोर्डिंग पास बेकार हो जाएगा. इसका जवाब है नहीं. प्रिंटेड बोर्डिंग पास पहले की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा. यात्री चाहें तो कागज वाला बोर्डिंग पास अपने साथ रख सकते हैं. फर्क सिर्फ इतना होगा कि 1 सितंबर से इमिग्रेशन अधिकारी उस पर मुहर नहीं लगाएंगे. यानी यात्रियों के पास दोनों विकल्प मौजूद रहेंगे. वे स्मार्टफोन में ई-बोर्डिंग पास दिखाएं या फिर प्रिंटेड कॉपी का इस्तेमाल करें. दोनों ही तरीके स्वीकार्य होंगे. बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगवाने की पुरानी अनिवार्यता ही खत्म की जा रही है.

आखिर बोर्डिंग पास पर मुहर लगाने की प्रक्रिया क्यों खत्म की गई?

ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन की समीक्षा में बोर्डिंग पास पर मुहर लगाने से जुड़ी व्यावहारिक परेशानियां सामने आईं. कई बार मुहर गलत जगह लगने या बोर्डिंग पास पर मौजूद महत्वपूर्ण जानकारी के ऊपर स्टैंप लग जाने से उसमें दर्ज विवरण पढ़ना मुश्किल हो जाता था. बोर्डिंग पास पर फ्लाइट से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां होती हैं. ऐसे में बेतरतीब तरीके से लगी मुहर कभी-कभी जानकारी को अस्पष्ट कर सकती थी. इसी तरह की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए पुरानी व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया गया. इस बदलाव से एक अतिरिक्त औपचारिकता कम होगी और यात्रियों को बोर्डिंग पास को लेकर अनावश्यक परेशानी से भी राहत मिल सकेगी.

BOI ने समीक्षा के बाद लिया बड़ा फैसला

इस बदलाव के पीछे ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन की लंबी समीक्षा अहम रही है. नई व्यवस्था को लेकर सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के संबंधित अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है, ताकि 1 सितंबर से बदली हुई प्रक्रिया के अनुसार काम किया जा सके. इमिग्रेशन प्रक्रिया विदेश यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है. ऐसे में बोर्डिंग पास पर मुहर लगाने की अनिवार्यता हटने के बाद यात्रियों के लिए प्रक्रिया का एक चरण आसान हो जाएगा. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इमिग्रेशन जांच की अन्य प्रक्रियाएं खत्म हो रही हैं. बदलाव सिर्फ बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगाने की व्यवस्था से जुड़ा है.

CISF ने बोर्डिंग पास पर मुहर लगाना पहले ही बंद कर दिया था

यहां यह समझना भी जरूरी है कि 1 सितंबर से लागू होने वाला बदलाव इमिग्रेशन काउंटर से जुड़ा है. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF की ओर से बोर्डिंग पास पर मुहर लगाने की प्रक्रिया कई साल पहले ही बंद की जा चुकी है. इसलिए नया फैसला सुरक्षा जांच की प्रक्रिया में कोई नया बदलाव नहीं करता, बल्कि इमिग्रेशन क्लीयरेंस के दौरान बोर्डिंग पास पर स्टैंप लगाने की व्यवस्था को समाप्त करता है. यात्रियों को एयरपोर्ट पर अलग-अलग प्रक्रियाओं को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है. 1 सितंबर से होने वाला बदलाव विशेष रूप से इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास की स्टैंपिंग से संबंधित है.

भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए आगे हो सकता है एक और बड़ा बदलाव

इस फैसले के साथ भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए भविष्य में इमिग्रेशन प्रक्रिया को और डिजिटल बनाने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है. आगे इमिग्रेशन एंट्री और एग्जिट के दौरान पासपोर्ट पर लगने वाले स्टैंप को खत्म करने की संभावना पर विचार हो रहा है. इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की योजना बनाई जा रही है. अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो बाद में इसे देश के अन्य हवाई अड्डों तक भी बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल 1 सितंबर से लागू होने वाला निश्चित बदलाव बोर्डिंग पास पर इमिग्रेशन की मुहर समाप्त करने को लेकर है. पासपोर्ट की एंट्री और एग्जिट स्टैंपिंग को लेकर संभावित बदलाव भविष्य की योजना और पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ा है.

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा, आसान भाषा में समझें

अगर आप 1 सितंबर या उसके बाद विदेश यात्रा कर रहे हैं, तो इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मुहर लगवाने की जरूरत नहीं होगी. आप अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल में मौजूद ई-बोर्डिंग पास या प्रिंटेड बोर्डिंग पास का इस्तेमाल कर सकेंगे. अगर आप कागज वाला बोर्डिंग पास रखना पसंद करते हैं, तो उसे रखना जारी रख सकते हैं. वह अमान्य नहीं होगा. सिर्फ उस पर इमिग्रेशन अधिकारी की मुहर नहीं लगेगी. वहीं, डिजिटल तरीके से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी प्रक्रिया आसान होगी क्योंकि ई-बोर्डिंग पास को स्वीकार किया जाएगा. कुल मिलाकर, 1 सितंबर से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान इमिग्रेशन प्रक्रिया से जुड़ी एक पुरानी औपचारिकता खत्म होने जा रही है. यह बदलाव डिजिटल यात्रा व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है. यात्रियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा सुविधा और कागजी झंझट में कमी के रूप में सामने आएगा. खासतौर पर उन लोगों के लिए जो अपने स्मार्टफोन में जरूरी यात्रा दस्तावेज रखना पसंद करते हैं, अब बोर्डिंग पास पर मुहर लगवाने की अतिरिक्त चिंता नहीं रहेगी.


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