Hisab Kitab: UPI यूज करना फ्री रहेगा या देने होंगे पैसे? समझिए पूरा मामला !

न्यूज तक डेस्क

10 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 10 2026 11:38 AM)

Hisab Kitab: हफ्ते भर से सोशल मीडिया पर यह बहस गर्म है कि क्या अब UPI पेमेंट फ्री नहीं रहेगा और इसके लिए पैसे चुकाने होंगे? सरकार लगातार सफाई दे रही है, लेकिन₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट और MDR चार्ज के नए प्रस्ताव को लेकर लोगों के मन में अभी भी कई सवाल हैं.

UPI पर MDR लागू करने की हो रही तैयारी
UPI पर MDR लागू करने की हो रही तैयारी
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 Hisab Kitab: अगर आप भी UPI यानी Unified Payments Interface से पेमेंट करते हैं तो अभी कोई चार्ज नहीं  लगता है. लेकिन यही पेमेंट क्रेडिट या डेबिट कार्ड से करें तो दुकानदार को सर्विस प्रोवाइडर (Visa , Master कार्ड ) को चार्ज देना पड़ता है और अगर यही पेमेंट आप RuPay कार्ड से करते हैं तो कोई चार्ज नहीं लगता है.  हालांकि कानून में प्रस्तावित बदलाव के बाद UPI और RuPay कार्ड पर भी चार्ज लग सकता है लेकिन वो आपको नहीं दुकानदार को चुकाना पड़ेगा.  ऐसे में क्या है ये पूरा मामला और UPI फ्री रहेगा या नहीं इसकी पूरी डिटेल इंडिया टुडे ग्रुप के Tak चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने साप्ताहिक कार्यक्रम 'हिसाब-किताब' में बताई है. चलिए विस्तार से जानते हैं

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हफ़्ते भर से सोशल मीडिया पर बहस चल रही है कि UPI फ्री नहीं रहेगा. सरकार रोज़ाना सफ़ाई दे रही है. दरअसल लोकसभा ने कानून पारित कर दिया है कि UPI और RuPay पेमेंट पर अब MDR यानी Merchant Discount Rate लग सकता है. यह चार्ज दुकानदार या कोई भी कंपनी सर्विस प्रोवाइडर को देती है. 2020 से पहले RuPay और UPI पर भी MDR लगता था. यह चार्ज लेनदेन में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और NPCI के बीच बंटता था. National Payments Corporation of India (NPCI) ही UPI का संचालन करता है. सरकार ने स्वदेशी पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए इस पर MDR जीरो कर दिया था . अमेरिकी कंपनी Visa और Master कार्ड को यह छूट नहीं मिली. 

MDR हटाने का बहुत बड़ा फ़ायदा हुआ

UPI से अब हर रोज़ करीब 1 लाख करोड़ रुपये का पेमेंट हो रहा है जबकि 5 साल पहले यह आँकड़ा करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये था. UPI को चलाने का खर्च पेमेंट कंपनियां और बैंक उठा रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस का अनुमान है कि यह खर्च करीब 20 हज़ार करोड़ रुपये है. सरकार हर साल करीब 2 हज़ार करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है. UPI को चलाने के लिए सर्वर और टेक्नोलॉजी का खर्च होता है. जैसे जैसे UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, यह खर्च भी बढ़ता जा रहा है.  सिस्टम अपग्रेड करने की जरूरत है. पिछले साल भर में कई बार UPI ठप होने की खबरें भी आई थीं. 

रॉयटर्स के मुताबिक़ MDR ₹2000 से ज़्यादा के लेनदेन पर ही विचार किया जा रहा है. यह चार्ज भी उन दुकानदारों या कंपनियों पर लगेगा जिनका टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये से ज़्यादा है.सरकार का कहना है कि UPI पर MDR क्रेडिट और डेबिट कार्ड से कम होगा. यह रेट 0.3 से 0.5% होने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसका मतलब हुआ कि ₹5000 का सामान ख़रीदा तो ₹15 से ₹25 दुकानदार चुकाएगा. लोग एक दूसरे से लेनदेन करेंगे तो उन्हें कोई चार्ज नहीं लगेगा चाहे अमाउंट कितना भी हो. 

अभी ₹2000 से ज़्यादा के UPI पेमेंट हर दिन 100 में से 4 ही होते हैं लेकिन इसकी वैल्यू 100 रुपये में से ₹67 होती है. Jeffries का अनुमान है कि MDR लगने से हर साल 5 से 10 हज़ार करोड़ रुपये की कमाई होगी. 

क्या यह कमाई छोड़ी जा सकती है?  

अब सवाल है कि क्या यह कमाई छोड़ी जा सकती है?  रिजर्व बैंक हर साल नोट छापने पर करीब 5 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च करता है तो डिजिटल पेमेंट के लिए सब्सिडी देने में क्या हर्ज है? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि रिजर्व बैंक सरकार को 2 लाख 86 हज़ार करोड़ रुपये डिवीडेंड देती है उसका एक हिस्सा सब्सिडी में दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही  अमेरिका के दबाव की बात आ रही है . जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया है कि RuPay के कारण अमेरिका की कंपनियों Master और Visa को नुक़सान हुआ है. इसी वजह से UPI और RuPay पर वापस MDR लाया जा रहा है. अमेरिका शिकायत कर चुका है कि उसकी कंपनियों को Level Playing Field नहीं मिल रही है. हालाँकि सरकार इस आरोप से इनकार करती है कि यह फ़ैसला अमेरिका के दबाव में लिया जा रहा है. वित्त मंत्री ने कहा कि रमेश दुष्प्रचार कर रहे हैं. 

सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच इतना तय है कि  फिलहाल आपके लिए UPI फ्री रहेगा. दुकानदार को ज़रूर पेमेंट करना पड़ सकता है. वैसे भी यह कानून राज्यसभा में पास होना है. फिर राष्ट्रपति को मंज़ूरी देनी है. इसके बाद रिज़र्व बैंक और अन्य संस्थाओं को तय करना होगा कि कितना चार्ज लगेगा? और कैसे लगेगा?

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