टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है. इस्तीफे की खबर के बाद अब उनके करियर, कमाई, मुनाफे से जुड़े कमीशन और संपत्ति पर चर्चा तेज हो गई है.
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एक किसान परिवार से निकलकर टाटा समूह की कमान तक पहुंचने वाले चंद्रशेखरन का सफर लंबे समय से चर्चा में रहा है. टाटा संस की सालाना रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि हाल के वर्षों में उनकी कमाई तेजी से बढ़ी है और उसमें सबसे बड़ा हिस्सा मुनाफे से जुड़े कमीशन का रहा.
किसान परिवार से टाटा संस तक का सफर
एन. चंद्रशेखरन का जन्म 1963 में तमिलनाडु के मोहनूर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग में थी.
उन्होंने 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से करियर शुरू किया. इसके बाद उन्होंने कंपनी में कई जिम्मेदारियां संभालीं और आगे चलकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक बने.
जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया. इसके बाद उन्होंने समूह के ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी, स्टील, पावर, होटल और विमानन जैसे कारोबारों की कमान संभाली.
वित्त वर्ष 2026 में कितनी रही कुल कमाई
टाटा संस की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में एन. चंद्रशेखरन को कुल 158.66 करोड़ रुपये मिले. यह रकम वित्त वर्ष 2025 के 155.81 करोड़ रुपये से ज्यादा है.
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, टाटा संस की तरफ से एग्जीक्यूटिव पेमेंट की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद यह उनका सबसे बड़ा सालाना भुगतान बताया गया है. इस कुल रकम में सिर्फ सैलरी शामिल नहीं थी.
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सैलरी से बड़ा रहा मुनाफे का कमीशन
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में उन्हें 17.97 करोड़ रुपये सैलरी और दूसरे लाभ के रूप में मिले. यह वित्त वर्ष 2025 के 15.12 करोड़ रुपये से करीब 18 फीसदी ज्यादा था.
उनकी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा 140.69 करोड़ रुपये का मुनाफे से जुड़ा कमीशन था. इससे साफ है कि उनकी कुल कमाई का बड़ा हिस्सा कंपनी के प्रदर्शन और मुनाफे से जुड़ा रहा.
कुल भुगतान 158.66 करोड़ रुपये रहा.सैलरी और दूसरे लाभ 17.97 करोड़ रुपये रहे.मुनाफे से जुड़ा कमीशन 140.69 करोड़ रुपये रहा.वित्त वर्ष 2025 में कुल भुगतान 155.81 करोड़ रुपये था.
पांच साल में करीब 685 करोड़ रुपये
सालाना रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 वित्त वर्षों में एन. चंद्रशेखरन ने कुल करीब 685 करोड़ रुपये कमाए. इसमें सैलरी, मुनाफे से जुड़ा कमीशन और दूसरे लाभ शामिल हैं.
अगर औसत निकालें तो पांच साल में उनकी सालाना कमाई करीब 137 करोड़ रुपये बैठती है. हालांकि, हर साल मिलने वाली रकम एक जैसी नहीं रही.
कमाई का पैकेज कैसे बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में उन्हें करीब 65 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज मिला था. इसके बाद 2021-22 में यह बढ़कर करीब 109 करोड़ रुपये पहुंच गया.
इसी दौर में वह देश के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले कारोबारी अधिकारियों में गिने जाने लगे. अब वित्त वर्ष 2026 में यह रकम 158.66 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
मुंबई में घर और संपत्ति पर क्या जानकारी है
रिपोर्टों के मुताबिक, 2020 में उन्होंने मुंबई के पेडर रोड इलाके में एक टावर में करीब 98 करोड़ रुपये का डुप्लेक्स फ्लैट खरीदा था. बताया गया था कि यह घर करीब 6000 वर्ग फुट में फैला है.
इस घर का मासिक किराया करीब 20 लाख रुपये बताया गया था. हालांकि, उनकी कुल निजी संपत्ति का कोई एक आधिकारिक और ताजा आंकड़ा सार्वजनिक रूप से साफ नहीं है. इसी वजह से अलग अलग रिपोर्टों में बताए गए नेटवर्थ के आंकड़ों को अंतिम या पक्का नहीं माना जा सकता.
उनके कार्यकाल में टाटा समूह कितना बढ़ा
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में जब उन्होंने टाटा संस की कमान संभाली, तब टाटा समूह का मुनाफा करीब 36728 करोड़ रुपये था. 2022 तक यह बढ़कर करीब 64267 करोड़ रुपये पहुंच गया.
इसी अवधि में समूह का राजस्व करीब 6.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.44 लाख करोड़ रुपये हो गया. उनके कार्यकाल में समूह ने प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया.
2017 में मुनाफा करीब 36728 करोड़ रुपये था.2022 तक मुनाफा करीब 64267 करोड़ रुपये पहुंच गया.राजस्व 6.37 lakh crore रुपये से बढ़कर 9.44 lakh crore रुपये हुआ.
अब अगला सवाल क्या है
चंद्रशेखरन की खास बात यह रही कि उन्होंने टाटा समूह के भीतर नीचे से ऊपर तक का सफर तय किया. 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से शुरुआत करने के बाद वह टाटा संस के चेयरमैन बने.
अब उनके इस्तीफे के बाद अगला चेयरमैन कौन होगा, इस पर नजर रहेगी. हालांकि, उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक चलने की उम्मीद है, इसलिए उत्तराधिकारी चुनने के लिए समूह के पास समय है.
कुल मिलाकर, एन. चंद्रशेखरन की कहानी एक किसान परिवार से देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक की शीर्ष कुर्सी तक पहुंचने की है. उनके इस्तीफे की खबर के साथ उनकी कमाई, कमीशन, संपत्ति और टाटा समूह में उनकी भूमिका फिर से चर्चा के केंद्र में आ गई है.
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