Gold silver news: रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर किया बड़ा दावा, तो क्या अभी और लुढ़केगा सोना ?

रॉबर्ट कियोसाकी ने माना कि सोने की कीमत पर उनका हालिया अनुमान गलत रहा, फिर भी उन्होंने अगले पांच साल में 35000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य दोहराया. साथ ही कियोसाकी ने ये अनुमान भी जताया है कि आने वाले दिनों में सोने का भाव क्रैश हो सकता है.

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तनीषा त्यागी

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कियोसाकी ने कहा- बाजार में ऊपर-नीचे चलना सामान्य बात होती है

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कियोसाकी का मानना है कि सही दाम पर खरीद भविष्य में फायदा देती

gold silver price news: मशहूर लेखक और निवेश की सलाह देने वाले रॉबर्ट कियोसाकी ने माना है कि सोने की कीमत को लेकर उनका हालिया अनुमान सही नहीं निकला. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि वह गलत थे और सोने की कीमत अभी भी गिर रही है. उनकी इस बात के बाद बाजार में नई चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, गलती मानने के बाद भी कियोसाकी ने सोने को लेकर अपना भरोसा नहीं बदला है. उनका कहना है कि अगले करीब पांच साल में सोना 35,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. इसी वजह से उनके ताजा बयान को आम निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है.

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कियोसाकी ने क्या कहा ?

रॉबर्ट कियोसाकी वही लेखक हैं जिन्होंने चर्चित किताब 'रिच डैड पुअर डैड' लिखी है. वह अक्सर सोना, चांदी और बिटकॉइन जैसे निवेश के साधनों में पैसा लगाने की सलाह देते रहे हैं. इस बार उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ कहा कि बाजार कभी ऊपर जाता है और कभी नीचे आता है, और यही असली हालात हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब भी भरोसा है कि अभी की गिरावट थोड़े समय की हो सकती है, जबकि लंबी अवधि में सोने की कीमत काफी ऊपर जा सकती है. उनके मुताबिक, मुनाफा खरीद के समय बनता है, बेचने के समय नहीं. आसान शब्दों में, उनका कहना है कि सही दाम पर की गई खरीद आगे चलकर फायदा दे सकती है.

निवेशकों के लिए उनकी सीख

अपनी पोस्ट में कियोसाकी ने कहा कि बड़े निवेशक सिर्फ आज को नहीं, बल्कि आने वाले समय को देखकर निवेश करते हैं. उन्होंने यह भी लिखा कि गलतियों से सीखना जरूरी है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है. उनके इस बयान को उनकी पिछली भविष्यवाणी पर सफाई और निवेशकों के लिए एक संदेश, दोनों तरह से देखा जा रहा है.

25 जून 2026 की पोस्ट से क्या फर्क है

कियोसाकी ने 25 जून 2026 को भी सोने और चांदी को लेकर तेजी की बात कही थी. उस समय उन्होंने निवेश सलाहकार जिम रिकार्ड्स का हवाला देते हुए कहा था कि सोना एक दिन 35,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी कहा था कि दुनिया में कर्ज बढ़ रहा है और अगर आर्थिक हालात बिगड़ते हैं, तो सोने की मांग बढ़ सकती है. इसी वजह से उन्होंने कहा था कि वह खुद भी असली सोना और चांदी खरीद रहे हैं.

अभी बाजार की चाल क्या कह रही है

फिलहाल बाजार की तस्वीर उनकी उम्मीद से अलग दिख रही है. हाल के दिनों में सोने की कीमत में गिरावट देखी गई है. भारत में भी खबर लिखे जाने तक 5 अगस्त 2026 एक्सपायरी वाला सोना 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ करीब 1.40 लाख रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा.

बाजार पर नजर रखने वालों के मुताबिक, इस कमजोरी के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और मुनाफावसूली जैसी वजहें हैं. यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें कियोसाकी को अपनी हालिया बात पर सफाई देनी पड़ी.

एक नजर में बड़ी बातें

• कियोसाकी ने माना कि सोने की कीमत को लेकर उनका हालिया अनुमान गलत साबित हुआ.

• इसके बावजूद उन्होंने अगले करीब पांच साल में सोने के 35,000 डॉलर प्रति औंस तक जाने का दावा दोहराया.

• उन्होंने कहा कि सही दाम पर खरीद लंबे समय में मुनाफे का आधार बन सकती है.

• 25 जून 2026 की अपनी पुरानी पोस्ट में भी उन्होंने सोना और चांदी में तेजी की बात कही थी.

35,000 डॉलर का लक्ष्य कितना संभव है

इस सवाल पर बाजार के जानकारों की राय एक जैसी नहीं है. कुछ जानकार मानते हैं कि अगर दुनिया में महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ती है, सरकारी कर्ज का दबाव गहराता है या दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा संकट आता है, तो सोने में तेज उछाल संभव है. दूसरी तरफ कई जानकारों का कहना है कि यह लक्ष्य बहुत आक्रामक है और इसे पाना आसान नहीं होगा. यानी अभी इस दावे को पक्की दिशा नहीं, बल्कि एक अनुमान की तरह देखा जा रहा है.

आम निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है

इस पूरे मामले से सबसे बड़ा संदेश यही है कि बाजार में कोई भी हमेशा सही नहीं होता. रॉबर्ट कियोसाकी जैसे बड़े नाम भी अपनी भविष्यवाणी को गलत मान सकते हैं. ऐसे में किसी एक व्यक्ति की राय के आधार पर निवेश का फैसला करना ठीक नहीं है. अपनी समझ, अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और लंबी अवधि की सोच के साथ ही आगे बढ़ना बेहतर माना जाता है.

कुल मिलाकर, कियोसाकी ने एक तरफ अपनी गलती मानी है, तो दूसरी तरफ सोने पर अपना लंबी अवधि वाला भरोसा भी दोहराया है. अभी बाजार में कमजोरी है, लेकिन आगे की दिशा को लेकर राय बंटी हुई है. इसलिए निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात है कि वे शोर नहीं, तथ्य देखें और सोच-समझकर फैसला लें.

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