Gold-Silver Price Alert: रूस का खजाना होने लगा खाली! 22 हजार किलो सोना बेच चुके हैं पुतिन, जानिए आखिर क्या है मजबूरी?

Gold-Silver Price Alert: बजट घाटे और युद्ध के खर्च को पूरा करने के लिए रूस ने 2026 में अब तक 21.8 टन सोना बेच दिया है. जहाँ एक तरफ रूसी सरकार खजाना खाली कर रही है, वहीं दूसरी तरफ चीन रूस से सोना खरीदने में सबसे आगे है.

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आने वाले दिनों में कैसा रहने वाला है सोने-चांदी का भाव.

सौरभ दीक्षित

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Gold-Silver Price Alert: दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शुमार रूस को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है. जिस देश ने पिछले दो दशकों तक पागलों की तरह सोना खरीदा और अपने खजाने को भरा, आज वही देश अपना सोना बेचने पर मजबूर है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 की शुरुआत से अब तक रूस के केंद्रीय बैंक ने करीब 21.8 टन (लगभग 22,000 किलो) सोना बेच दिया है.

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आखिर रूस जैसा दिग्गज देश अपने सोने के भंडार को क्यों खाली कर रहा है? क्या पुतिन की अर्थव्यवस्था किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है? आइए समझते हैं इस पूरी कहानी को विस्तार से.

खजाना भरने वाला रूस अब 'सेलर' क्यों बना?

रूस के इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह है पैसों की तंगी. यूक्रेन के साथ युद्ध अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है. लंबे खिंचते युद्ध ने रूस के बजट को बुरी तरह बिगाड़ दिया है. मार्च 2026 के अंत तक रूस का बजट घाटा 61.2 अरब डॉलर तक पहुँच गया है. आसान भाषा में कहें तो रूस की कमाई कम और रक्षा खर्च (Defence Spending) कहीं ज्यादा हो रहा है. इसी घाटे की भरपाई के लिए सरकार को अपने 'गोल्ड रिजर्व' का सहारा लेना पड़ रहा है.

  • आंकड़ों की जुबानी: रूस की मजबूरी
  • बिकवाली की रफ्तार: सिर्फ मार्च महीने में ही रूस ने करीब 6.22 टन सोना बाजार में निकाला है.
  • मौजूदा भंडार: 1 अप्रैल 2026 तक रूस के पास कुल 2304.76 टन गोल्ड रिजर्व बचा है.
  • इतिहास: 2002 से 2025 के बीच रूस ने 2900 टन से ज्यादा सोना जमा किया था, लेकिन 2020 के बाद यह रफ्तार धीमी हुई और अब बिकवाली का दौर शुरू हो गया है.

सरकार बेच रही, जनता खरीद रही!

हैरानी की बात यह है कि जहाँ रूस का केंद्रीय बैंक सोना बेच रहा है, वहीं वहां की आम जनता सोना खरीदने के लिए टूट पड़ी है. मॉस्को एक्सचेंज के डेटा बताते हैं कि मार्च में गोल्ड ट्रेडिंग वॉल्यूम साल भर पहले के मुकाबले 350% बढ़ गया. रूसी मुद्रा 'रूबल' में आती कमजोरी को देखते हुए लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए सोने को सबसे भरोसेमंद ठिकाना मान रहे हैं.

चीन का 'मास्टरस्ट्रोक'

रूस अपना सोना बेच रहा है, तो सवाल उठता है कि खरीद कौन रहा है? यहाँ एंट्री होती है चीन की. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि 2025 की पहली छमाही में रूस से चीन को होने वाला कीमती धातुओं (सोना-चांदी) का निर्यात लगभग दो गुना हो गया है. चीन के लिए यह एक सुनहरा मौका है क्योंकि रूस पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से अपना माल ऊंचे दामों पर बेचने की कोशिश कर रहा है और चीन अपना रिजर्व मजबूत करने में जुटा है.

भारत में सोने का हाल (24 अप्रैल 2026)

अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच भारतीय बाजार में 24 अप्रैल को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई. 5 जून 2026 की डिलीवरी वाला सोना MCX पर 161 रुपये की नरमी के साथ 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था.

क्या यह खतरे की घंटी है?

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड प्रोड्यूसर है, जो हर साल 300 टन से ज्यादा सोना खदानों से निकालता है. ऐसे देश का अपना पुराना रिजर्व बेचना इस बात का साफ संकेत है कि पश्चिमी प्रतिबंधों और युद्ध के खर्च ने रूसी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. यह सिर्फ व्यापार नहीं है, बल्कि एक आर्थिक जंग है जहाँ सोना अब निवेश से ज्यादा 'सर्वाइवल' का जरिया बन गया है.

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