Silver Hallmarking: चांदी की ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में शुद्धता की जांच और आसान हो सकती है. चांदी की बढ़ती मांग और हॉलमार्किंग में तेजी को देखते हुए Bureau of Indian Standards यानी BIS अपनी टेस्टिंग क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत आने वाले करीब दो वर्षों में देशभर में चांदी की ज्वेलरी की जांच करने वाली रेफरल और असेंसिंग लैबोरेटरी का नेटवर्क बढ़ाने की योजना है. इस कदम का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ सकता है, क्योंकि ज्यादा टेस्टिंग सेंटर होने से चांदी के आभूषणों की शुद्धता जांचने की क्षमता बढ़ेगी और हॉलमार्क वाले प्रोडक्ट्स पर भरोसा मजबूत हो सकता है.
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सोने के महंगे होने से चांदी की तरफ बढ़ा रुझान
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऐसे माहौल में कई ग्राहकों के लिए चांदी एक अपेक्षाकृत किफायती विकल्प बनकर सामने आई है. इसका असर चांदी की ज्वेलरी की मांग पर भी दिखाई दे रहा है. मांग बढ़ने के साथ ग्राहकों के लिए यह जानना भी ज्यादा जरूरी हो गया है कि जिस चांदी की ज्वेलरी के लिए वे पैसा खर्च कर रहे हैं, उसकी वास्तविक शुद्धता कितनी है. इसी जरूरत को देखते हुए BIS अपनी टेस्टिंग और हॉलमार्किंग से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहा है.
BIS बढ़ाएगा चांदी की जांच की क्षमता
BIS की डिप्टी डायरेक्टर जनरल निशात एस. हक के अनुसार, चांदी की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग को लेकर मांग लगातार बढ़ रही है. मौजूदा BIS लैबोरेटरी नेटवर्क अगले करीब दो वर्षों तक बढ़ती जरूरतों को संभालने में सक्षम है. इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में रेफरल और असेंसिंग लेबोरेटरी की संख्या और क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
इसका मकसद सिर्फ टेस्टिंग की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि चांदी की ज्वेलरी की गुणवत्ता की जांच के लिए एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना भी है. इससे बाजार में हॉलमार्क वाले चांदी के आभूषणों की निगरानी और जांच को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकेगा.
चांदी की हॉलमार्किंग में तेजी
भारत में चांदी की हॉलमार्किंग साल 2005 से स्वैच्छिक है. यानी इसे अनिवार्य व्यवस्था के तौर पर नहीं, बल्कि स्वैच्छिक आधार पर लागू किया गया है. लेकिन हाल के वर्षों में हॉलमार्क वाली चांदी की मांग में तेजी देखने को मिली है. सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाली चांदी की ज्वेलरी पर HUID यानी Hallmark Unique Identification नंबर भी दिया जा रहा है.
HUID के जरिए ग्राहक हॉलमार्क वाले आभूषण से जुड़ी शुद्धता की जानकारी को सत्यापित कर सकते हैं. ऐसे में चांदी की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों के लिए हॉलमार्क और HUID की जानकारी को समझना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.
एक साल में लगभग दोगुनी हुई हॉलमार्किंग
चांदी की हॉलमार्किंग से जुड़े आंकड़े भी इस बढ़ती मांग की तस्वीर दिखाते हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 32 लाख चांदी के आभूषणों पर हॉलमार्किंग हुई थी. वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 59 लाख हो गया. यानी सिर्फ एक साल के भीतर हॉलमार्क किए गए चांदी के आभूषणों की संख्या में काफी बड़ी बढ़ोतरी हुई है. यही वजह है कि आने वाले समय में टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है.
देश में करीब 230 Assaying and Hallmarking Centres
मौजूदा समय में देश में BIS से मान्यता प्राप्त करीब 230 Assaying and Hallmarking Centres हैं. इन केंद्रों पर चांदी की ज्वेलरी की जांच और हॉलमार्किंग से जुड़ा काम किया जाता है. अगर चांदी की हॉलमार्किंग की मांग इसी तरह बढ़ती रहती है, तो मौजूदा नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में ज्यादा टेस्टिंग सेंटर और बेहतर क्षमता बाजार की जरूरत को पूरा करने में मदद कर सकती है. BIS का मानना है कि मजबूत टेस्टिंग नेटवर्क से ज्वेलरी की गुणवत्ता को लेकर ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा. खासतौर पर ऐसे समय में जब चांदी की ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ रही है, शुद्धता की पुष्टि करने वाली व्यवस्था ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है.
हॉलमार्क वाले प्रोडक्ट्स की बाजार में निगरानी भी होती है
BIS सिर्फ ज्वेलरी की टेस्टिंग तक सीमित नहीं है. हॉलमार्क वाले उत्पादों की बाजार निगरानी भी की जाती है. बाजार से हॉलमार्क वाले उत्पादों के सैंपल लिए जाते हैं और उनकी जांच की जाती है. अगर जांच में गुणवत्ता या शुद्धता से जुड़ी कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित मामले में कार्रवाई की जा सकती है.
BIS के अनुसार, हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की बाजार निगरानी के लिए उसकी अपनी लैबोरेटरी का इस्तेमाल किया जाता है. इस काम को बाहरी लैबोरेटरी को आउटसोर्स नहीं किया जाता. यह व्यवस्था इसलिए अहम है क्योंकि हॉलमार्क का उद्देश्य सिर्फ एक पहचान देना नहीं, बल्कि ग्राहकों को आभूषण की गुणवत्ता को लेकर ज्यादा भरोसा देना भी है.
BIS का लैब नेटवर्क भी हुआ मजबूत
टेस्टिंग की बढ़ती जरूरत के साथ BIS ने पिछले वर्षों में अपनी लैबोरेटरी व्यवस्था का भी विस्तार किया है. फिलहाल BIS की देशभर में 10 अपनी लैबोरेटरी हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में मान्यता प्राप्त निजी और सरकारी लैबोरेटरी भी BIS के नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं. आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014 में BIS से मान्यता प्राप्त लैबोरेटरी की संख्या करीब 147 थी. अब यह संख्या बढ़कर लगभग 440 हो गई है. इसके अलावा करीब 350 सरकारी लैबोरेटरी भी BIS से जुड़ी हुई हैं. इससे साफ है कि BIS ने टेस्टिंग और क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर लगातार काम किया है.
चांदी खरीदने वालों के लिए इसका क्या मतलब है?
BIS की नई तैयारी का सबसे बड़ा फायदा चांदी के ग्राहकों को मिल सकता है. जैसे-जैसे टेस्टिंग और हॉलमार्किंग का नेटवर्क मजबूत होगा, चांदी की ज्वेलरी की शुद्धता की जांच की क्षमता भी बढ़ेगी. ग्राहकों के लिए हॉलमार्क और HUID जैसी जानकारी भरोसे का एक अतिरिक्त आधार बन सकती है. खासतौर पर महंगी चांदी की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को आभूषण की शुद्धता से जुड़ी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए.
कुल मिलाकर, चांदी की बढ़ती मांग के बीच BIS का टेस्टिंग नेटवर्क बढ़ाने का फैसला क्वालिटी और ग्राहक भरोसे के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है. आने वाले करीब दो वर्षों में रेफरल और असेंसिंग लैबोरेटरी के विस्तार से देश में चांदी की हॉलमार्किंग की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
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