भिलाई में आस्था का अद्भुत नजारा: एक ही पंडाल में विराजे 101 ईको-फ्रेंडली गणपति, देखें भव्य तस्वीरें

रघुनंदन पंडा

• 04:35 PM • 16 Sep 2026

छत्तीसगढ़ के भिलाई में महाराष्ट्र सांस्कृतिक मंडल द्वारा 101 ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का भव्य मंदिरनुमा पंडाल सजाया गया है। 27 सालों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा में भक्त अपनी मन्नतें पूरी होने और अपनों की याद में स्व-खर्च पर बप्पा के ये स्वरूप स्थापित करते हैं.

छत्तीसगढ़ में ईको फ्रेंड
छत्तीसगढ़ में ईको फ्रेंड
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छत्तीसगढ़ की इस्पात नगरी भिलाई में इन दिनों गणेशोत्सव की एक अलग ही बहार देखने को मिल रही है. शहर के हुड़को सेक्टर में महाराष्ट्र सांस्कृतिक मंडल द्वारा आयोजित गणेशोत्सव इस बार आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. यहाँ बने भव्य मंदिरनुमा पंडाल में 10 फीट की मुख्य प्रतिमा के साथ-साथ बप्पा के 101 अलग-अलग स्वरूप विराजित किए गए हैं.

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1999 से शुरू हुआ सफर

महाराष्ट्र सांस्कृतिक मंडल के इस आयोजन की शुरुआत वर्ष 1999 में अष्टविनायक की 8 प्रतिमाओं के साथ हुई थी. समय के साथ श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा जुड़ती गई और यह सफर बढ़ता चला गया. मंडल के अध्यक्ष नितिन फुले ने बताया कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के सामाजिक संदेश को आगे बढ़ाते हुए मंडल इस साल अपना 27वां गणेशोत्सव मना रहा है.

वर्ष 2017 में एक साथ 108 गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने पर इस भव्य आयोजन का नाम 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी दर्ज हो चुका है. इस बार पंडाल में 10 फीट की विशाल मुख्य प्रतिमा के दोनों ओर 3-3 फीट की 50-50 ईको-फ्रेंडली प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं.

श्रद्धा, मन्नत और अपनों की यादों का संगम

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पंडाल में विराजित 101 प्रतिमाएं पूरी तरह से भक्तों द्वारा स्वेच्छा और स्व-खर्च पर स्थापित कराई जाती हैं.

  • कोई भक्त अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी में प्रतिमा स्थापित कराता है.
  • कई लोग अपने दिवंगत परिजनों की पावन स्मृति में बप्पा का स्वरूप स्थापित करते हैं.
  • विवाह की वर्षगांठ और बच्चों के जन्मदिन जैसे अवसरों को यादगार बनाने के लिए भी भक्त यहाँ प्रतिमाएं भेंट करते हैं.

स्थानीय श्रद्धालु श्रद्धा कश्यप ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी माँ की स्मृति में यहाँ प्रतिमा स्थापित कराई है. उन्होंने कहा कि भिलाई को 'मिनी इंडिया' कहा जाता है, जहाँ हर संस्कृति का सुंदर मेल दिखता है. वहीं, गणेश भक्त डॉ. अमित नायक ने सभी प्रतिमाओं के ईको-फ्रेंडली होने की सराहना करते हुए श्रद्धालुओं से बप्पा के दर्शन करने की अपील की.

डिजिटल तकनीक और सामाजिक सरोकार

पंडाल की भव्य सजावट और डिजिटल लाइटिंग दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है. देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए बप्पा के दर्शन कर रहे हैं. धार्मिक आयोजन के साथ-साथ मंडल द्वारा रक्तदान शिविर जैसे सामाजिक कार्य भी आयोजित किए जा रहे हैं. पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती ये मिट्टी की प्रतिमाएं और बप्पा के 101 स्वरूप इस बार भिलाई के गणेशोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रहे हैं.

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