NIA ने की लीपापोती, BJP बचा रही असली कातिल... झीरम घाटी केस में भूपेश बघेल का बड़ा हमला

रघुनंदन पंडा

• 04:16 PM • 07 Sep 2026

भूपेश बघेल ने झीरम घाटी हमले की NIA जांच को 'लीपापोती' बताते हुए भाजपा सरकार पर असली साजिशकर्ताओं को बचाने का आरोप लगाया है. उन्होंने मामले का पूरा सच सामने लाने के लिए एसआईटी (SIT) की रुकी हुई जांच को तुरंत आगे बढ़ाने की मांग की है.

Bhupesh Baghel
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झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर आए हालिया अदालती फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. दुर्ग जिले के अहिवारा स्थित शासकीय स्वामी आत्मानंद स्कूल में शिक्षक दिवस के मौके पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की जांच को पूरी तरह लीपापोती करार देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार मुख्य साजिशकर्ताओं और बड़े नक्सली नेताओं को बचा रही है.

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कोर्ट के फैसले का सम्मान

कोर्ट के फैसले पर अपनी बात रखते हुए भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि वे न्यायपालिका के फैसले का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह से एनआईए ने इस पूरे मामले की जांच की है वो बेहद निराशाजनक है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस केस की नींव ही कमजोर रखी गई और कई अहम पहलुओं को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया.

बघेल ने आरोप लगाया कि शुरुआती FIR में दर्ज कई प्रमुख नामों को बाद में हटा दिया गया, जिससे बड़े नक्सली कमांडर कार्रवाई से बच निकले. वहीं इतने बड़े हमले के पीछे सिर्फ हमलावर ही शामिल नहीं थे, बल्कि एक गहरी राजनीतिक और प्रशासनिक साजिश भी थी, जिसकी कोई जांच ही नहीं की गई. जिस समय ये हमला हुआ था उस वक्त सुरक्षा में भारी चूक हुई थी. खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी चूक की बात मानी थी, फिर भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

तीन साल से SIT की जांच दबाकर बैठी है सरकार

भूपेश बघेल ने अपनी तत्कालीन सरकार के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि NIA की ढिलाई को देखते हुए ही कांग्रेस सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन किया था. एनआईए ने इस एसआईटी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत में हर बार जीत कांग्रेस सरकार की हुई.

पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता बदलते ही इस एसआईटी की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. पिछले तीन सालों से बीजेपी सरकार इस मामले की फाइलें दबाकर बैठी है ताकि हमले का पूरा सच जनता के सामने न आ सके.

सरेंडर नक्सलियों के बयान न लेने पर उठाए सवाल

हमले से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए बघेल ने कहा कि एनआईए ने पहले यह जानकारी दी थी कि रमन्ना और गुड्डू साउ सेंडी जैसे प्रमुख नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे. लेकिन बरसों बीत जाने के बाद भी उनके बयान क्यों नहीं लिए गए? आखिर एजेंसी किसको बचाने की कोशिश कर रही है?

शिक्षक दिवस पर गुरुजनों का किया सम्मान

मीडिया से बातचीत करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वामी आत्मानंद स्कूल में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने वहां मौजूद बच्चों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि वे राष्ट्र के निर्माता होते हैं. उन्होंने सभी गुरुजनों का आभार जताया और उनके योगदान को सराहा.

झीरम घाटी मामले पर भूपेश बघेल के इन तल्ख बयानों के बाद प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज होने के आसार हैं. देखना होगा कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है.

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