गुजारा भत्ता केस: अब पति भी पूछ सकेगा पत्नी की कमाई का हिसाब, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मनीष शरण

• 05:04 PM • 03 Sep 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि भरण-पोषण के मामलों में निष्पक्ष न्याय के लिए पति को पत्नी की कमाई और आय के स्रोतों पर जिरह करने का पूरा अधिकार है.

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पति और पत्नी के बीच चल रहे भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) के मुकदमों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संतुलित फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कर दिया है कि पत्नी अपनी कितनी कमाई कर रही है और उसके पास आय के क्या-क्या जरिए हैं, इस पर पति सवाल उठा सकता है. हाईकोर्ट ने माना कि निष्पक्ष न्याय के लिए दोनों पक्षों की असली आर्थिक स्थिति सामने आना बहुत जरूरी है.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल, रायपुर की एक महिला ने अपने पति से भरण-पोषण की मांग करते हुए दुर्ग फैमिली कोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत अर्जी दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (रजनेश बनाम नेहा मामला) के मुताबिक, महिला ने अपनी संपत्ति और कमाई से जुड़ा एक शपथ पत्र (Affidavit) भी कोर्ट में जमा किया.

पेच तब फंसा जब पति ने पत्नी द्वारा दिए गए शपथ पत्र की सच्चाई परखने और उसकी कमाई के साधनों पर सवाल करने (cross-examination/जिरह) की इजाजत मांगी. दुर्ग फैमिली कोर्ट ने पति को यह सवाल पूछने से मना कर दिया.

फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द

फैमिली कोर्ट के रुख से नाराज होकर पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उसकी दलील थी कि अगर उसे पत्नी के दावों पर सवाल उठाने का हक ही नहीं मिलेगा, तो वह अपना बचाव कैसे करेगा?

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने पति के हक में फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें पति को रोका गया था.

अदालत की मुख्य बातें

  • सच्चाई जानने का अधिकार: पति को पत्नी के आय संबंधी शपथ पत्र पर जिरह करने की पूरी छूट होगी, ताकि वह अपनी बात साबित कर सके.
  • समय की पाबंदी: कोर्ट ने चेतावनी दी कि जिरह के नाम पर बेफिजूल सवाल दोहराकर अदालत का समय बर्बाद न किया जाए. कोशिश यह रहे कि एक ही दिन में गवाही पूरी कर ली जाए.
  • समान अधिकार: हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम दोनों पर लागू होता है. पत्नी के पास भी पूरा अधिकार है कि वह पति की असली कमाई और संपत्ति का हिसाब मांगे.

न्याय के लिए पारदर्शिता जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि किसी भी पक्ष को अपनी बात रखने या अपना बचाव करने से रोकना निष्पक्ष न्याय के खिलाफ है. अदालत ने अपने इस फैसले की प्रति तुरंत दुर्ग फैमिली कोर्ट के जज तक पहुंचाने के निर्देश जारी किए हैं.

इस फैसले के बाद अब गुजारा भत्ता तय करने से पहले कोर्ट के सामने पति और पत्नी, दोनों की कमाई का पूरा और सच्चा ब्योरा होना अनिवार्य हो गया है.

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