छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुशासन और मर्यादा के उल्लंघन के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब सोशल मीडिया पर आईजी डांगी से जुड़ी कुछ ऐसी तस्वीरें वायरल हुईं जिन्हें एक जिम्मेदार अधिकारी के पद और कद के खिलाफ माना जाता है. तस्वीरें वायरल होने के बाद गृह विभाग ने इस सस्पेंशन पर अपनी मुहर लगा दी है.
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क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?
सरकारी आदेशों की मानें तो रतन लाल डांगी का आचरण उस ऊंचे पद की गरिमा के साथ मेल नहीं खा रहा था जिस पर वे तैनात थे. सरकार की शुरुआती जांच में यह पाया गया कि उन्होंने उन सर्विस रूल्स की अनदेखी की है जो एक प्रशासनिक अधिकारी के लिए अनिवार्य होते हैं. उन पर नैतिकता की सीमाओं को लांघने और अपने पद के रसूख का गलत फायदा उठाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. सरकार ने इस कदम से ये भी साफ कर दिया है कि सामाजिक और पेशेवर मर्यादाओं का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
विभागीय छवि पर दाग
आजकल सोशल मीडिया की पहुंच हर घर तक है और यही वजह है कि वायरल तस्वीरों ने विभाग की मुश्किलों को और बढ़ा दिया. सरकार का मानना है कि इन तस्वीरों के सार्वजनिक होने से पुलिस विभाग की छवि जनता के बीच खराब हुई है, इसी को आधार बनाकर 'अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968' के तहत उनके खिलाफ शिकंजा कसा गया है. मामले की तह तक जाने के लिए एक विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं.
निलंबन के दौरान क्या होंगे नियम?
जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, रतन लाल डांगी का ठिकाना नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) रहेगा. सस्पेंशन के दौरान वो मुख्यालय की सीमा पार नहीं कर पाएंगे और अगर उन्हें कहीं जाना भी हुआ तो इसके लिए उन्हें विभाग के अधिकारियों से परमीशन लेनी पड़ेगी. हालांकि, नियमों के अनुसार उन्हें इस दौरान जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा.
प्रशासन का यह कड़ा संदेश राज्य के अन्य अधिकारियों के लिए भी एक बड़ी सीख है कि डिजिटल दुनिया में आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके पूरे करियर और विभाग के सम्मान को दांव पर लगा सकती है.
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