अगर आपसे कोई कहे कि एक खास केमिकल से काले और रद्दी पड़े कागजों को असली नोटों में बदला जा सकता है तो यकीनन आप इसे बचकाना मजाक समझेंगे. लेकिन इसी नामुमकिन से दिखने वाले झांसे में आकर देश भर के 100 से ज्यादा लोग अपनी गाढ़ी कमाई लुटा चुके हैं. छत्तीसगढ़ की तेलीबांधा पुलिस ने एक ऐसे ही हाईटेक और अंतर-राज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो 'ब्लैक मनी को असली कैश' बनाने और पैसे दोगुना करने के नाम पर करोड़ों की चपत लगा रहा था. पुलिस ने इस सिलसिले में गिरोह से जुड़े कुल 9 लोगों को दबोचा है, जिनमें से 7 मुख्य आरोपियों को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार करके रायपुर लाया गया है.
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खंडाला के रिसॉर्ट में रंगे हाथों धरे गए आरोपी
इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब रायपुर पुलिस ने नागपुर से दो महिलाओं- कनीज फातिमा और दीपिका पालीवाल—को हिरासत में लिया. दोनों से सख्ती से पूछताछ और डिजिटल सुरागों के तार जोड़ते हुए पुलिस की एक टीम पुणे पहुंची. करीब हफ्ते भर तक संदिग्धों का पीछा करने के बाद पुलिस ने पुणे जिले के खंडाला स्थित एक लग्जरी रिसॉर्ट में छापा मारा.
छापेमारी के वक्त आरोपी बनारस के एक शख्स को अपना अगला शिकार बना रहे थे. वह व्यक्ति अपने पैसे दोगुना कराने के लालच में करोड़ों रुपये नकद लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था. पुलिस ने ऐन मौके पर दबिश देकर आरोपियों को रंगे हाथों धर दबोचा.
मौके से 4 करोड़ से ज्यादा कैश और जादुई 'केमिकल' बरामद
पुलिस ने मौके से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है. इसके अलावा आरोपियों के पास से 17 मोबाइल फोन, नोटों के आकार में कटे हुए काले कागज, कांच की प्लेटें और कथित केमिकल की बोतलें बरामद हुई हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह साल 2005 से सक्रिय था और अब तक छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली में 100 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना चुका था.
ठगी का 'मास्टर' प्लान: कैप्टन और बड़े सर का खेल
यह गैंग पूरी योजनाबद्ध तरीके से काम करता था. आरोपी बड़े-बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स में मीटिंग्स फिक्स करते थे. वहां शिकार के सामने असली नोटों पर एक खास केमिकल डालकर डेमो दिखाया जाता था, जिससे पीड़ितों को भरोसा हो जाता था कि काले कागज सच में नए नोट बन जाते हैं.
भरोसा जीतने के बाद आरोपी अलग-अलग बहाने बनाकर किश्तों में मोटी रकम वसूलते थे:
- विदेशों से महंगा केमिकल मंगवाने का खर्च
- केमिकल की लैब टेस्टिंग की फीस
- कथित 'सरकारी अप्रूवल' और एनओसी पाने के नाम पर वसूली
मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी गिरफ्तार
रायपुर पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क को मुख्य रूप से तीन लोग चला रहे थे—ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ 'योगी' (46), प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ 'कैप्टन' (52) और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ 'बड़े सर' (55). इनके अलावा विवेक सिंह, शुभम पांडे, योगेंद्र चौहान और बालमुकुंद दीक्षित को भी गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है. गिरोह के कुछ सदस्य पहले भी मुंबई और वाराणसी की जेलों की हवा खा चुके हैं.
तेलीबांधा थाना पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि बाकी बचे सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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