रेप केस में सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बोला- 'अगर पेनिट्रेशन नहीं तो यह बलात्कार नहीं बल्कि रेप की कोशिश'

मनीष शरण

• 05:54 PM • 18 Feb 2026

Chhattisgarh High Court rape verdict: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रेप केस की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना पेनिट्रेशन केवल बाहरी टच को भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत बलात्कार नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे 'बलात्कार का प्रयास' माना जाएगा. कोर्ट ने धारा 511 के तहत सजा लागू करने की बात कही. विस्तार से जानिए पूरा मामला.

Chhattisgarh High Court rape verdict
Chhattisgarh High Court rape verdict
Google CTA

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आज एक रेप के मामले में सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की है. हाई कोर्ट में सुनवाई करते हुए उन्होंने साफ किया है कि, अगर पेनिट्रेशन नहीं होता है और सिर्फ प्राइवेट पार्ट टच होते है तो इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत बलात्कार नहीं माना जा सकता है. हालांकि कोर्ट ने कहा है कि यह कृत्य भी गंभीर और इसे 'बलात्कार का प्रयास' माना जाएगा. इस मामले में IPC की धारा 511 के तहत सजा दी जाएगी.

Read more!

रेप केस में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने की टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक पुराने रेप केस की सुनवाई चल रही थी. इस केस में निचली अदालत ने आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराया था. फिर मामला हाई कोर्ट पहुंचा जहां पर मौजूद तथ्यों और सबूतों का फिर से आकलन(समीक्षा) की गई. इस दौरान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि अभियोजन पक्ष इस बात को साबित करने में नाकाम रहा है कि घटना के वक्त पेनिट्रेशन हुई थी, क्योंकि बलात्कार की परिभाषा के लिए पेनिट्रेशन का होना जरूरी माना जाता है.

'कृत्य गंभीर लेकिन बलात्कार नहीं'

मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 की कानूनी तौर पर व्याख्या करते हुए कहा कि, बलात्कार के अपराध के लिए पेनिट्रेशन यानी प्रवेश करना अनिवार्य है. केवल पुरुष और महिला के प्राइवेट का टच होना कानूनन बलात्कार नहीं माना जाएगा. हालांकि अदालत ने इस कृत्य को भी गंभीर अपराध बताया है और कहा है कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है.

बलात्कार और बलात्कार के प्रयास में कानूनी अंतर

इस मामले में हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई बलात्कार की सजा को संशोधित करते हुए आरोपी को 'बलात्कार का प्रयास' का दोषी ठहराया. कोर्ट ने माना है कि आरोपी की मंशा और हरकत साफ दिखाती है कि उसने बलात्कार करने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो सका. 

अदालत ने आगे यह भी कहा कि कानून का उद्देश्य अपराध की गंभीरता के अनुरूप सजा सुनिश्चित करना है. ऐसे मामलों में, जहां पीड़िता की गरिमा और शारीरिक स्वतंत्रता पर हमला हुआ हो, वहां अपराध साबित होने पर सख्त दंड दिया जाना चाहिए, लेकिन सजा तय करते समय कानूनी प्रावधानों और अपराध के तत्वों का पालन भी उतना ही आवश्यक है. इस फैसले को आपराधिक कानून की व्याख्या के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें बलात्कार और बलात्कार के प्रयास के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है.

यह खबर भी पढ़ें: UGC Bill 2026 पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे, 19 मार्च को होगी अगली सुनवाई, फिलहाल लागू रहेंगी 2012 की गाइडलाइंस