छत्तीसगढ़: पत्नी काले और मोटे होने का उड़ाती थी मजाक, पति तलाक मांगने पहुंच गया कोर्ट, हाई कोर्ट ने खारिज की अर्जी

संजय शर्मा

25 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 25 2026 11:51 AM)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पति को 'सांवला' या 'मोटा' कहना तलाक का कानूनी आधार नहीं हो सकता और यह क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता.

तलाक के मामले पर कोर्ट की टिप्पणी
तलाक के मामले पर कोर्ट की टिप्पणी
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रंग-रूप या शारीरिक बनावट को लेकर ताने कसना तलाक का कानूनी आधार नहीं हो सकता. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि पति को काला या मोटा कहना क्रूरता के दायरे में नहीं आता और इसके आधार पर शादी नहीं तोड़ी जा सकती. जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें एक पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया गया था.

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क्या है पूरा विवाद?

मामला जांजगीर-चांपा जिले के रहने वाले 28 साल के अक्ष घोष और रायगढ़ की 25 साल की पूजा सीत से जुड़ा है. दोनों की शादी मार्च 2019 में हुई थी. शादी के कुछ ही महीनों बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई. पति का आरोप था कि उसकी पत्नी उसके साथ सही व्यवहार नहीं करती थी, उसे काले रंग और मोटापे का ताना देती थी और बिना बताए मायके चली जाती थी. पति ने यह भी दावा किया कि पत्नी के राजस्थान जाने के दौरान उसका गर्भपात (जुड़वां बच्चे) हो गया था और वह बिना किसी ठोस वजह के वापस लौटने से मना कर रही थी.

दूसरी ओर, पत्नी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पति पर गंभीर आरोप लगाए. महिला का कहना था कि उसके पति का किसी अन्य औरत के साथ संबंध था. जब उसे इस बात का पता चला, तो पति ने शराब पीकर उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया. महिला के मुताबिक, प्रेगनेंसी के दौरान भी उसका सही इलाज नहीं कराया गया, जिसके बाद उसकी मां उसे रायगढ़ ले आई.

कोर्ट ने क्यों खारिज की तलाक की अर्जी?

जांजगीर की फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका खारिज करते हुए पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया था और उसका स्त्रीधन लौटाने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ पति ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने पूरे मामले के सबूतों और बयानों की समीक्षा के बाद पाया कि पति अपनी पत्नी पर लगाए गए क्रूरता या छोड़ कर चले जाने (परित्याग) के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि:

  • पत्नी द्वारा पति को सांवला या मोटा कहना इतना गंभीर आधार नहीं है कि इसके लिए तलाक की डिक्री जारी कर दी जाए.
  • पति यह साबित नहीं कर पाया कि उसकी पत्नी बिना किसी वाजिब वजह के अपने मायके में रह रही थी.
  • आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए.

मामले में 25 जून को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जिसे 18 सितंबर को सुनाया गया. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से मना करते हुए पति की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया.

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