Chhattisgarh News: दुर्ग में NPS घोटाला, जिंदा लोगों को मृत बताकर उड़ाए 1.19 करोड़ रुपये

Chhattisgarh News: दुर्ग में NPS के तहत 15 जिंदा खाताधारकों को मृत दिखाकर करीब 1.19 करोड़ रुपये की फर्जी विड्रॉल का खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी गिरफ्तार है, जबकि एक सहयोगी फरार है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है.

छत्तीसगढ़ न्यूज
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रघुनंदन पंडा

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NPS Scam: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में करोड़ों की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि जिंदा खाताधारकों को कागजों में मृत दिखाकर करीब 1 करोड़ 19 लाख रुपये निकाल लिए गए. दुर्ग पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि उसका एक सहयोगी अब भी फरार है.

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कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब भिलाई स्टील प्लांट के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर मृत्यु दावा पेश किया गया. जांच में सामने आया कि संबंधित व्यक्ति जिंदा है. शक गहराने पर HDFC लाइफ इंश्योरेंस के बोकारो (झारखंड) स्थित प्रबंधक ने दुर्ग पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पाटन थाना पुलिस ने जांच शुरू की और एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ.

कौन है आरोपी?

पुलिस ने 44 वर्षीय राजेश कनोजिया को गिरफ्तार किया है, जो दुर्ग जिले के बोरसी का निवासी है और एक ऑनलाइन सेवा केंद्र चलाता था. आरोप है कि वह ग्राहकों से आधार, पैन और बैंक डिटेल्स जुटाता था. इसके बाद फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और केवाईसी दस्तावेज तैयार कर NPS के तहत मृत्यु दावा दाखिल करता और पूरी रकम निकलवा लेता था.

पुलिस के अनुसार इस पूरे खेल में खाताधारकों से पहले ही 5 प्रतिशत कमीशन एडवांस लिया जाता था. इस मामले में कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी राजेश कुमार ठाकुर का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज सिस्टम में अपलोड किए और सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दावे पास कराए. वह फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है.

नियमों का कैसे किया गया दुरुपयोग?

NPS के नियमों के मुताबिक खाताधारक जीवित रहते अधिकतम 60% रकम ही निकाल सकते हैं जबकि 40% राशि पेंशन के रूप में मिलती है, लेकिन मृत्यु की स्थिति में पूरी राशि नामिनी को दी जाती है. आरोपियों ने इसी प्रावधान का फायदा उठाया और जिंदा लोगों को मृत दिखाकर 100% रकम निकलवा ली.

जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। कई फर्जी दावों में एक जैसे पते मिले कुछ मृत्यु प्रमाण पत्रों के क्यूआर कोड अमान्य पाए गए और रकम संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर की गई.

पुलिस का बयान

भिलाई नगर के सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि पाटन थाना क्षेत्र में NPS के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायत मिली थी. प्राथमिक जांच में मामला सही पाए जाने के बाद मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. उनके मुताबिक, कुल 1 करोड़ 19 लाख रुपये की फर्जी मृत्यु दावा राशि तैयार कर आहरित की गई.

पुलिस ने आरोपी के पास से नकदी और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं. अब जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि इस नेटवर्क के तार कहीं अन्य जिलों या राज्यों तक तो नहीं जुड़े हैं. फिलहाल एक आरोपी सलाखों के पीछे है और दूसरा फरार. लेकिन इस मामले ने पेंशन जैसी भरोसेमंद योजना की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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