छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह जिले दुर्ग से सरकारी दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है. दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग स्थित सेलूद गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से तंग आकर स्कूली छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ गया. स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय में टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल न होने के विरोध में करीब 200 छात्र-छात्राओं ने बजरंग चौक पर चक्काजाम कर दिया.
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क्या है पूरा मामला?
बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे विद्यार्थी लामबंद होकर पाटन रोड पर बैठ गए, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब आधे घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा. छात्राओं का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूल में टॉयलेट न होने की समस्या झेल रही हैं. कई बार शिकायत के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए सड़क पर आना पड़ा.
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मौके पर बुलाने की मांग की. मामला बढ़ता देख पाटन तहसीलदार रस्तोगी मौके पर पहुंचे. उन्होंने बच्चों से बात की, स्कूल परिसर का मुआयना किया और जल्द से जल्द शौचालय निर्माण शुरू कराने का ठोस आश्वासन दिया, जिसके बाद विद्यार्थियों ने जाम समाप्त किया.
छात्राओं ने जाहिर किया दर्द
किंजल कुर्रे (आठवीं की छात्रा): "हमारा चक्काजाम करने का मकसद अपनी परेशानी बताना था. स्कूल में न टॉयलेट है और न ही बाउंड्रीवॉल. अधिकारियों के लिए छह महीने में बड़ी इमारतें बन जाती हैं, लेकिन 200 बच्चों के लिए एक टॉयलेट नहीं बन पा रहा. लड़के खुले में चले जाते हैं, पर लड़कियां कहां जाएं?"
वैशाली (सातवीं की छात्रा): "शौचालय न होने से हमें रोज परेशानी झेलनी पड़ती है. अधिकारियों ने फॉर्म दिया है और 10 दिनों के भीतर काम शुरू कराने का समय मांगा है."
राजनीतिक बयानबाजी और मंत्री की सफाई
शिक्षा मंत्री के अपने ही जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूल की ऐसी हालत पर अब सवाल उठ रहे हैं. इस मामले पर छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा, "बच्चों का आंदोलन अपनी जगह सही है, लेकिन कई जगहों पर विपक्षी दल (कांग्रेस) के स्थानीय नेता बच्चों की आड़ में राजनीति कर रहे हैं. सेलूद स्कूल में शौचालय था, लेकिन पंचायत के ध्यान न देने से वह खराब हो गया. मैंने टीम भेज दी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा."
प्रशासन के आश्वासन के बाद बच्चे फिलहाल कक्षाओं में लौट चुके हैं, लेकिन उनका साफ कहना है कि अगर जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
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