दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए दर्दनाक इमारत हादसे की गूंज अब छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर तक पहुंच गई है. बी.कॉम और प्रशासनिक सेवा (IAS) की तैयारी कर रहे दुर्ग के होनहार छात्र युवराज सोनी का पार्थिव शरीर जैसे ही दो दिन बाद उनके गृह नगर पहुंचा, पूरे इलाके में मातम पसर गया. जिस घर से कुछ दिन पहले बेटा मुस्कुराते हुए दिल्ली के लिए निकला था, वहां से जब उसकी अंतिम यात्रा निकली तो देखने वालों की आंखें छलक पड़ीं.
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दुर्ग के रहने वाले युवराज सोनी दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के मोतीलाल नेहरू कॉलेज के छात्र थे और अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. रक्षाबंधन के त्योहार पर युवराज घर आए थे. बहन से कलाई पर राखी बंधवाकर और परिजनों से ढेर सारा प्यार समेटकर वे अपनी पढ़ाई पूरी करने वापस दिल्ली चले गए थे. किसी को अंदाजा भी नहीं था कि बहन से उनका वह वादा और मुलाकात आखिरी साबित होगी.
तीन मंजिला जर्जर इमारत अचानक ढह गई
6 सितंबर को सत्य निकेतन इलाके में बनी तीन मंजिला जर्जर इमारत अचानक ढह गई. इस इमारत में छात्र पीजी बनाकर रह रहे थे. हादसे की खबर मिलते ही दुर्ग में बैठा परिवार स्तब्ध रह गया. जब युवराज की मौत की पुष्टि हुई, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
बुधवार को जब विशेष शव वाहन से युवराज का पार्थिव शरीर उनके घर के बाहर रुका, तो चीख-पुकार मच गई. इकलौते बेटे के शांत पड़े शरीर को देखकर माता-पिता बदहवास हो गए, वहीं बहन अपने भाई को पुकार-पुकार कर रोती रही. युवराज के अंतिम दर्शन के लिए स्थानीय नागरिकों, रिश्तेदारों और दोस्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. नम आंखों और गमगीन माहौल के बीच परिजनों ने अपने लाल का अंतिम संस्कार किया.
पूर्व महापौर धीरज बाकलीबाल ने जताया दुख
इस दुखद घटना पर दुख जताते हुए दुर्ग के पूर्व महापौर धीरज बाकलीबाल ने प्रशासन और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए.
"दुर्ग का मासूम युवराज अपने मन में हजारों सपने संजोकर दिल्ली पढ़ने गया था. उसके माता-पिता ने भी उसके लिए न जाने कितने ख्वाब देखे थे. सत्य निकेतन में जर्जर बिल्डिंग का गिरना और हमारे बीच से युवराज का यूं चले जाना बेहद दुखद है. वह बहुत ही सीधा-साधा बच्चा था, जो पढ़ाई के साथ IAS बनने की तैयारी कर रहा था. यह सीधे तौर पर लापरवाही का नतीजा है. चाहे दिल्ली हो या दुर्ग, प्रशासन को वक्त रहते सतर्क होना चाहिए ताकि किसी और का चिराग इस तरह न बुझे."
सत्य निकेतन हादसे ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि ऐसे कई पीजी संचालकों और प्रशासनिक अनदेखी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो छात्रों की सुरक्षा को ताक पर रखकर इमारतें किराए पर चला रहे हैं. दुर्ग शहर ने आज अपना एक होनहार रत्न खो दिया.
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