छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे और सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. राज्य के इतिहास में पहली बार अफीम की कमर्शियल खेती का इतना बड़ा मामला उजागर हुआ है. दुर्ग पुलिस ने पुलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम समोदा और झेंझरी के बीच छापेमारी कर लगभग 8 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत के अफीम के पौधे जब्त किए हैं. इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
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मक्का और ज्वार की आड़ में 'काला सोना'
पुलिस को जब समोदा-झेंझरी के बीच शिवनाथ नदी के तट पर अवैध खेती की सूचना मिली तो अधिकारियों को भी अंदाजा नहीं था कि मामला इतना बड़ा होगा. करीब 110 एकड़ के विशाल भूभाग को कटीले तारों (फेंसिंग) से घेरा गया था. बाहर से देखने पर वहां गेहूं, धान, मक्का और चना जैसी आम फसलें नजर आ रही थीं, लेकिन जब स्पेशल टीम ने भीतर प्रवेश किया तो दंग रह गई. आरोपियों ने मक्का और ज्वार के ऊंचे पौधों के बीच 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम की फसल छिपा रखी थी.
ड्रिप सिंचाई और बाउंसर्स का पहरा
यह कोई साधारण खेती नहीं थी बल्कि इसे बेहद आधुनिक और सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया जा रहा था. पौधों को विकसित करने के लिए बाकायदा ड्रिप इरिगेशन की व्यवस्था की गई थी. ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, इस वीरान इलाके में सुरक्षा के लिए बाउंसर्स तैनात किए गए थे ताकि कोई बाहरी व्यक्ति या चरवाहा खेत के अंदर न जा सके.
बीजेपी नेता और राजस्थान का कनेक्शन
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में स्थानीय भाजपा किसान नेता विनायक ताम्रकार के अलावा राजस्थान का रहने वाला विकास बिश्नोई और मनीष उर्फ गोलू ठाकुर शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, विकास बिश्नोई मूल रूप से राजस्थान से है और वही खेती की तकनीक और नेटवर्क संभाल रहा था. इस मामले में एक अन्य आरोपी अचला राम जाट फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में दुर्ग पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है.
प्रशासनिक जांच और रिकॉर्ड्स पर सवाल
दुर्ग कलेक्टर अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर अफीम मिली है वह निजी भूमि है. खसरा नंबर 309 और 310 मधुमती और प्रीति बाला ताम्रकार के नाम दर्ज है जो आरोपी विनायक के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं. कलेक्टर ने अब राजस्व विभाग को 'गिरदावरी' (फसल रिकॉर्ड) की जांच के निर्देश दिए हैं. सवाल ये उठ रहा है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस जमीन पर कौन सी फसल दर्ज दिखाई गई थी और पटवारी या स्थानीय प्रशासन की नजर इस पर अब तक क्यों नहीं पड़ी.
आरोपी की सफाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी विनायक ताम्रकार ने खुद को बेगुनाह बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है. उसने मीडिया से कहा, "मैं भाजपा का सिपाही हूं, मुझे फंसाया जा रहा है. मैंने अपनी जमीन रेक (बटाई) पर दी थी, वहां राजस्थान के लोग क्या बो रहे थे, मुझे इसकी जानकारी नहीं है." हालांकि, दुर्ग रेंज के IG अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि ग्रामीण कह रहे हैं कि यह काम पिछले तीन साल से चल रहा था और पुलिस इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचने के लिए NCB (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की मदद भी ले रही है. फिलहाल पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अफीम की फसल को जब्त कर लिया है और जल्द ही इसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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