Chhattisgarh News: बस्तर संभाग में पत्रकारों और पुलिस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. गीदम थाना क्षेत्र में हुई एक घटना और उसके बाद पत्रकार रौनक शिवहरे की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को पूरे बस्तर के पत्रकारों ने मोर्चा खोल दिया. सुकमा समेत संभाग के सातों जिलों में पत्रकारों ने मौन धरना देकर पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए और मामले की न्यायिक जांच की मांग की है.
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क्या है पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत कुछ दिन पहले गीदम में हुई एक सड़क घटना से हुई. बताया जा रहा है कि बास्तानार के इरपा गांव का एक ग्रामीण अनियंत्रित तरीके से ट्रैक्टर चला रहा था, जिससे हादसे की स्थिति बन गई थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल हुए- एक में ट्रैक्टर चालक की लापरवाही दिख रही थी तो दूसरे में उसके साथ हुई मारपीट. इस घटना ने तब तूल पकड़ लिया जब एक विशेष समुदाय ने उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम शुरू कर दिया.
एट्रोसिटी एक्ट और पत्रकार की गिरफ्तारी
विवाद बढ़ता देख पुलिस ने आनन-फानन में पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके परिजनों के खिलाफ मारपीट के साथ-साथ एट्रोसिटी एक्ट (Atrocity Act) के तहत केस दर्ज कर लिया. पुलिस ने पत्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से अब परिजनों की गिरफ्तारी के लिए पांच दिन का अल्टीमेटम दिया गया है. पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने किसी बड़े दबाव में आकर एकतरफा और जल्दबाजी में यह कार्रवाई की है.
सुकमा में पत्रकारों का मौन विरोध
दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ के आह्वान पर सुकमा जिला मुख्यालय में बड़ी संख्या में पत्रकार जुटे. पत्रकारों ने एक घंटे का मौन धारण कर अपना विरोध दर्ज कराया. इसके बाद कलेक्टर अमित कुमार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया. पत्रकारों का कहना है कि एक छोटी सी सड़क दुर्घटना को जिस तरह से गंभीर धाराओं और एट्रोसिटी एक्ट में बदला गया, वह संदेह पैदा करता है.
सामाजिक समरसता की अपील
धरना प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने बस्तर में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार समाज का आईना होते हैं और उनके खिलाफ इस तरह की दमनकारी कार्रवाई लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. पत्रकारों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
इस विरोध प्रदर्शन में कोंटा, दोरनापाल, छिंदगढ़ और तोंगपाल समेत सुकमा जिले के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम प्रतिनिधि शामिल हुए. पत्रकारों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, उनका लोकतांत्रिक विरोध जारी रहेगा.
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