VIDEO: कभी उठाई थी बंदूक, अब रैंप पर दिखाया टैलेंट! सुकमा की 9 महिला आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बिखेरा जलवा

जितेंद्र बहादुर सिंह

14 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 14 2026 3:46 PM)

रायपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सुकमा की 9 आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने कोसा सिल्क पहनकर रैंप वॉक किया. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनकी सराहना की. जानिए पुनर्वास नीति से कैसे बदल रही है बस्तर की तस्वीर.

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कभी नक्सली वर्दी पहन हाथों में बंदूक लिए जंगल-जंगल घूमने वाली जिन नक्सली महिलाओं के तेवर देख लोगों के पसीने छूट जाते थे, अब उनका बदला रूप देख सभी चकित हैं. उन्हीं महिलाएं ने फैशनेबल पोशाक पहन रैंप पर ऐसा कैटवॉक किया कि वीडियो चर्चा का विषय बन गया है. हर कोई इस बदलाव की तरीफ कर रहा है. नक्सलवाद को छोड़, हथियार डालकर मुख्य धारा से जुड़ने वाली महिलाओं की बदली जिंदगी हर किसी को चौंका रही है. 

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छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति और कौशल विकास पहल के सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय बुनकर सम्मेलन में एक बेहद ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला. यहां सुकमा जिले की 9 आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने राज्य के पारंपरिक कोसा सिल्क और हैंडलूम वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया. 

मुंबई से आए एक्सपर्ट्स ने महिलाओं को किया ग्रूम 

कभी जंगलों में बंदूकें थामने वाली ये महिलाएँ आज आत्मविश्वास से परिपूर्ण नज़र आईं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने इन महिलाओं के साहस की सराहना की तथा उनसे सीधा संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाया। मुंबई से आए पेशेवर विशेषज्ञों ने लगातार 7 दिनों तक इन महिलाओं को ग्रूमिंग, रैंप वॉक और मंच पर आत्मविश्वास से बोलने का विशेष प्रशिक्षण दिया था।

कभी भय और असुरक्षा थी, आज खुशियां ही खुशियां हैं- राजे 

सुकमा की समर्पित नक्सली महिला राजे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संगठन में रहते हुए जीवन हमेशा डर के साये में गुजरता था. हर कदम पर पीछे मुड़कर यह देखना पड़ता था कि कहीं पुलिस तो नहीं आ रही है। हमेशा जान जाने का डर बना रहता था. राजे ने बताया कि नक्सली संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण करने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल रही है. अब वे खुले माहौल में अपनी मर्जी से जीवन जी रही हैं और भविष्य को लेकर खुश हैं. पुनर्वास केंद्र में रहकर उन्हें राजमिस्त्री, ड्राइविंग सहित विभिन्न रोजगारमूलक कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें स्वरोजगार के लिए भी तैयार किया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

यह आयोजन केवल एक फैशन शो नहीं था, बल्कि हिंसा से विकास और भय से विश्वास की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ की एक जीवंत तस्वीर है. यह पहल सुकमा और पूरे बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सम्मानजनक पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है. 

सतत निगरानी, सघन जांच और तेज कार्रवाई से घटा है नक्सली दायरा- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव