दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन और हिंसा को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है. आंदोलनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रमुख चेहरे अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए दिल्ली पुलिस और बाहरी असामाजिक तत्वों की मिलीभगत से पूरी साजिश रची गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल पर मीडिया में पथराव और तोड़फोड़ की फर्जी खबरें चलाने के लिए दिल्ली पुलिस ने खुद ही पत्थरों से भरा ट्रक और एक टूटी हुई गाड़ी खड़ी की थी.
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प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने का तीखा विरोध
अभिजीत दिपके ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हालांकि भारी दबाव के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री ने अपना इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपना बेहद निराशाजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि जोशी को पूर्व में बिल्किस बानो मामले के दोषियों का स्वागत करते देखा गया था. ऐसे में देश के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. इसके साथ ही उन्होंने आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को तुरंत 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब रातों-रात सरकारें गिरानी होती हैं या विधायक खरीदने होते हैं, तब नियमों का हवाला नहीं दिया जाता, लेकिन पीड़ित परिवारों की मदद के समय ही सरकार को सारे नियम-कानून याद आते हैं.
जंतर-मंतर पर पत्थरों से भरा ट्रक और फर्जी पथराव का सच
आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर विस्तार से बोलते हुए दिपके ने सीधे तौर पर दिल्ली पुलिस की नीयत पर सवाल उठाए. उन्होंने खुलासा किया कि 20 जुलाई के प्रस्तावित मार्च से ठीक एक रात पहले, यानी 19 जुलाई की रात को पुलिस ने जंतर-मंतर पर मंच के पीछे पत्थरों से भरा एक ट्रक और एक डैमेज्ड वैन खड़ी कर दी थी. जब उन्होंने अगली सुबह 5:30 बजे इसका वीडियो ट्वीट किया, तो पुलिस ने इसे एमसीडी का कंस्ट्रक्शन मलबा बताकर बात दबाने की कोशिश की. हालांकि, बाद में सामने आया कि वह ट्रक एक हिट एंड रन मामले में जब्त हुआ था. उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को पथराव और हिंसा की खबरें दिखाने के लिए यह पूरी पटकथा पुलिस द्वारा पहले ही तैयार कर ली गई थी.
सुरक्षा व्यवस्था में चूक या सुनियोजित नाकामी?
अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जिस जगह पर सीजेपी के प्रतिनिधियों और मीडियाकर्मियों की बिना गहन चेकिंग के एंट्री तक संभव नहीं थी, वहां पुलिस के अनुसार 2100 अपराधी बिना चेकिंग के कैसे घूम रहे थे. इसके अलावा, आंदोलन में पश्चिम बंगाल से पकड़े गए संदिग्ध आतंकी (JMB ऑपरेटिव) की मौजूदगी की खबरों पर उन्होंने गृह मंत्रालय और खुफिया तंत्र को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि जब निहत्थे छात्रों और लड़कियों पर लाठियां भांजनी होती हैं, तब पुलिस बेहद मुस्तैद दिखती है, लेकिन असामाजिक तत्वों को रोकने के मामले में यह जानबूझकर किया गया फेलियर नजर आता है.
देश में अफोर्डेबल एजुकेशन और बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत
शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर विचार व्यक्त करते हुए दिपके ने कहा कि आज देश में पहली-दूसरी कक्षा की पढ़ाई भी इतनी महंगी हो चुकी है कि आम परिवार अपनी बचत से भी फीस नहीं भर पा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस पर कैपिंग (सीमा) लगाई जाए और सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए. इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा में आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि वंचितों को शिक्षा का अधिकार मिलना ही चाहिए और सीटों की कमी दूर करने के लिए नए शिक्षण संस्थान खोले जाने चाहिए. उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि लोग आरक्षण का विरोध तो करते हैं, लेकिन पैसे देकर एडमिशन लेने वाले 'मैनेजमेंट कोटा' पर चुप रहते हैं.
चुनावी राजनीति से दूरी, 'प्रेशर ग्रुप' के तौर पर काम करेगी CJP
भविष्य की योजनाओं को लेकर अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी का कोई राजनीतिक पार्टी बनाने का विचार नहीं है. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाओं से आम जनता का भरोसा उठता जा रहा है. देश की 60% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और 80% शिक्षित युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, लेकिन कोई भी राजनीतिक दल इनकी बात नहीं कर रहा है. इसलिए देश को चुनाव लड़ने वाली पार्टी की नहीं, बल्कि युवाओं के हक के लिए लड़ने वाले एक मजबूत 'प्रेशर ग्रुप' की जरूरत है.
व्यक्तिगत हमलों और 'एंटी-नेशनल' के आरोपों पर तीखा जवाब
आरएसएस द्वारा आंदोलन को एंटी-नेशनल बताए जाने पर अभिजीत दिपके ने पलटवार करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारों की विचारधारा का समर्थन करने वाले लोगों को किसी और को देशद्रोही कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. वहीं, अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठाए जा रहे सवालों और आरटीआई (RTI) याचिकाओं पर उन्होंने साफ किया कि वे अपने एजुकेशन लोन और स्कॉलरशिप के सभी आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं. बांग्लादेश आंदोलन से तुलना किए जाने पर उन्होंने कहा कि पुलिस बर्बरता के बावजूद भारतीय छात्रों ने हिंसा का सहारा न लेकर मीम्स और ह्यूमर के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया है.
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