दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद 16 अक्टूबर को CJP के अभिजीत दिपके ने CP के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है. लेकिन इससे पहले कई व्यापारी संगठनों ने उप-राज्यपाल को एक पत्र लिखकर इन प्रदर्शनों के कारण होने वाली परेशानियों को बताया है. वहीं खान मार्केट एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लेकिन अब यह विवाद बढ़ते हुए नजर आ रहा है, क्योंकि अब CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसका जवाब दिया है. उन्होंने कहा है कि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के कारण व्यापार प्रभावित नहीं होता है. यह तब होता है जब सरकार पूरे शहर को बंद कर देती है. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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अभिजीत दिपके ने क्या कुछ कहा?
व्यापारी संगठनों के प्रदर्शन के खिलाफ कड़े रुख के बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए अपनी बातें लिखी है. उन्होंने लिखा कि, 'शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों से कारोबार को नुकसान नहीं होता. नुकसान तब होता है जब सरकार पूरे शहर को बंद करने, इंटरनेट सेवाएं रोकने, अपने ही नागरिकों की आवाजाही पर पाबंदी लगाने और शहर को युद्ध-क्षेत्र में तब्दील करने का फैसला लेती है.
दिपके ने आगे लिखा,
'अपनी शुरुआत से ही, कॉकरोच जनता पार्टी का यह मानना रहा है कि हम हमेशा गांधीजी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे, और हम अपने इस वादे पर कायम रहे हैं. हमने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में विरोध प्रदर्शन किए हैं, और ये सभी पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहे हैं. जयपुर में मुझ पर हमला भी हुआ, लेकिन फिर भी मैंने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की, क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है. हम शारीरिक बल का इस्तेमाल करने के बजाय, डॉ. बी. आर. अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग करना बेहतर समझते हैं. हमारी ताकत संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता से आती है, और चाहे हमें कितना भी उकसाया जाए, हम इन मूल्यों को कभी नहीं छोड़ेंगे.'
'सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं'
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि, 'इसके बावजूद, हमें लगातार अराजकतावादी के रूप में पेश करने की कोशिश की जाती है, सिर्फ इसलिए क्योंकि हम चुप रहने से इनकार करते हैं. लेकिन सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है, अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध करना अराजकता नहीं है, और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से सवाल पूछना तो बिल्कुल भी अराजकता नहीं है. ये लोकतंत्र की सबसे बुनियादी अभिव्यक्तियां हैं. आज जो पार्टी सत्ता में है, उसने विपक्ष में रहते हुए दशकों तक विरोध-प्रदर्शन किए, सड़कों पर उतरी और तत्कालीन सरकारों से सवाल पूछे. अगर उनके खिलाफ भी वैसी ही पाबंदियां लगाई जातीं, उन्हें डराया-धमकाया जाता और पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ता, तो आज सत्ता के पदों पर बैठे कई लोग शायद वहां तक कभी पहुंच ही नहीं पाते. यह घोर पाखंड है कि जब आप विपक्ष में हों तो विरोध-प्रदर्शन को एक लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में सराहें, और जब आप सत्ता में आ जाएं तो उसी काम को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानने लगें.'
'वोट की गिनती के बाद लोकतंत्र नहीं होता खत्म'
दिपके ने इसी पोस्ट में आगे लिखा कि, 'हम कोई विशेषाधिकार या विशेष बर्ताव नहीं मांग रहे हैं. हम बस उन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहते हैं जो इस गणतंत्र के हर नागरिक को मिले हुए हैं, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी हो. इसलिए, आइए इस देश के नागरिक के तौर पर अपना कर्तव्य निभाएं- जिन्हें हम चुनते हैं उनसे सवाल पूछें, जवाबदेही मांगें और जहां भी अन्याय देखें, वहां अपनी आवाज उठाएं. जनता द्वारा चुनी गई सरकार का यह फर्ज है कि वह लोगों की बात सुने, न कि उनकी आवाज दबा दें. वोट की गिनती पूरी हो जाने के बाद लोकतंत्र खत्म नहीं हो जाता.'
व्यापारियों ने की क्या है मांगे?
दरअसल दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन समेत कई व्यापारिक संगठनों ने दिल्ली के उप-राज्यपाल को एक लेटर लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन की वजह से होने वाले नुकसान और परेशानियों का जिक्र किया है. उनका कहना है कि प्रदर्शन के कारण दुकान, होटल और रेस्टोरेंट में ग्राहक नहीं आते है, जिसकी वजह से कारोबार पर बुरा असर पड़ता है. उन्होंने अपने लेटर में जुलाई 2026 को जंतर-मंतर प्रदर्शन और 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया है.
वहीं CJP के आज के तिरंगा मार्च से पहले सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई है, जहां उन्होंने मामले में तुरंत निर्देश जारी करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि सभी पक्ष अपनी समझदारी से काम लेंगे. वहीं NDMC के सेंट्रल पार्क को बंद करने की वजह से छोटे दुकानदारों को होने वाले नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरत से ज्यादा चीजें होती है तो कोर्ट के पास मुआवजे का भी अधिकार है.
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