'यह जजों पर दबाव बनाने की साजिश...', जज के बच्चों वाले हलफनामे पर CBI का केजरीवाल को कड़ा प्रहार

Arvind Kejriwal CBI case: दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल के हलफनामे पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो का बड़ा जवाब सामने आया है. एजेंसी ने इसे जजों पर दबाव बनाने की साजिश बताया है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से जुड़े रिक्यूजल विवाद पर अब कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है. जानिए पूरा मामला और आगे क्या हो सकता है.

Arvind Kejriwal CBI case
Arvind Kejriwal CBI case Update

दिनेश यादव

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दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच 'रिक्यूजल' (केस से हटने की मांग) का मामला अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है. केजरीवाल द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चों को लेकर किए गए खुलासे वाले हलफनामे पर सीबीआई (CBI) ने अपना लिखित जवाब दाखिल कर दिया है. सीबीआई ने केजरीवाल की मांग को 'सोची-समझी साजिश' करार देते हुए कहा है कि अगर इसे स्वीकार किया गया, तो देश की पूरी न्यायिक व्यवस्था चरमरा जाएगी.

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सीबीआई की दलील: 'अयोग्य हो जाएंगे देश के आधे जज'

अरविंद केजरीवाल ने अपने हलफनामे में दावा किया था कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकील पैनल में शामिल हैं, इसलिए उन्हें इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लेना चाहिए. इसके जवाब में सीबीआई ने तर्क दिया कि अगर इस दलील को मान लिया गया, तो देश भर के उन सभी जजों को केंद्र या राज्य सरकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई से अयोग्य ठहराना पड़ेगा, जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल पर वकील हैं. सीबीआई ने कहा कि यह तर्क पूरी तरह अतार्किक है और इससे जजों को संबंधित सरकारों या राजनीतिक नेताओं के मामलों की सुनवाई करने से वंचित कर दिया जाएगा.

'संस्था को बदनाम करने और दबाव बनाने का मकसद'

एजेंसी ने केजरीवाल के इस कदम को 'आफ्टरथॉट' (बाद में सोच-समझकर उठाया गया कदम) बताया है. सीबीआई का आरोप है कि इस हलफनामे का असली मकसद अदालती संस्था और न्यायाधीशों को बदनाम करना तथा उन पर दबाव बनाना है. सीबीआई ने अदालत को चेतावनी देते हुए कहा कि न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ एक संगठित सोशल मीडिया अभियान चलाया जा रहा है. अगर अदालत इस दबाव में आकर 'रिक्यूजल' का फैसला करती है, तो यह एक गलत मिसाल कायम होगी और इससे बेईमान मुकदमेबाजों को बढ़ावा मिलेगा कि वे जजों को शर्मिंदा कर अपना मामला दूसरी बेंच में शिफ्ट करवा लें.

क्या है पूरा मामला?

अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई के मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से सुनवाई न करने की गुजारिश करते हुए एक रिक्यूजल एप्लीकेशन लगाई थी. 16 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केजरीवाल के उस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति दे दी थी, जिसमें उन्होंने जज के बच्चों के केंद्र सरकार के पैनल में होने का दावा किया था. केजरीवाल का तर्क है कि इससे निष्पक्ष सुनवाई पर असर पड़ सकता है.

अब केजरीवाल के जवाब का इंतजार

कानूनी प्रक्रिया के तहत सीबीआई के इस जवाब (रिजॉइन्डर) पर अब अरविंद केजरीवाल को अपना पक्ष रखना है. सीबीआई जहां जज बदलने की मांग को खारिज करने पर अड़ी है, वहीं केजरीवाल की टीम इस मुद्दे को और मजबूती से उठाने की तैयारी में है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली हाई कोर्ट इस संवेदनशील मामले पर क्या फैसला सुनाता है.

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'फैसला सुरक्षित है, दोबारा नहीं खुलेगा केस'! केजरीवाल के हलफनामे पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का दो टूक जवाब, जानें कोर्ट रूम का पूरा अपडेट

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