Arvind Kejriwal court case: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके करीबियों की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है. कोर्ट ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक अवमानना मामले में एक बड़ी नियुक्ति की है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुग्गल की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राजदीपा बेहूरा को 'एमिकस क्यूरी' यानी न्यायमित्र नियुक्त कर दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि राजदीपा बेहूरा इस कंटेंप्ट केस में अदालत को कानूनी पहलुओं पर निष्पक्ष सहायता और सुझाव देंगी. इसके साथ ही वे इस केस में अरविंद केजरीवाल की तरफ से दलीलें भी पेश करेंगी, ताकि कानूनी प्रक्रिया बिना किसी प्रभाव के सुचारू रूप से चल सके.
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कौन हैं राजदीपा बेहूरा?
राजदीपा बेहूरा दिल्ली की एक बेहद वरिष्ठ और प्रतिष्ठित वकील हैं, जिन्हें कानून की पेचीदगियों और संवेदनशील मामलों का लंबा अनुभव है. दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक अवमानना मामले में 'एमिकस क्यूरी' यानी 'न्यायमित्र' के रूप में नियुक्त किया है. न्यायमित्र वह निष्पक्ष कानूनी विशेषज्ञ होता है, जो किसी भी राजनीतिक या व्यक्तिगत दबाव से दूर रहकर अदालत को सही और सटीक कानूनी सलाह देता है. इस मामले में राजदीपा बेहूरा न केवल अदालत की सहायता करेंगी, बल्कि अरविंद केजरीवाल का पक्ष और उनसे जुड़ी दलीलें भी पूरी निष्पक्षता के साथ कोर्ट के सामने रखेंगी.
क्या है यह पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लेकर की गई कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियों से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं द्वारा की गई इन टिप्पणियों के जरिए कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी. इसी को लेकर कोर्ट ने अब बेहद सख्त रुख अपनाया है.
हाई कोर्ट की दो कड़ियां और फ्रेश नोटिस
इस मामले में कोर्ट के सामने दो अलग-अलग कड़ियां हैं, जिन पर अब एक साथ सुनवाई होगी. पहला मामला खुद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए 14 मई को शुरू किया था. दूसरा मामला एडवोकेट अशोक चैतन्य की तरफ से दायर किया गया है, जिसमें केजरीवाल के अलावा पत्रकार सौरभ दास, आप नेता सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय को भी पक्षकार बनाया गया है. चूंकि गोपाल राय और पत्रकार सौरभ दास पहले स्वतः संज्ञान वाले मामले में सीधे शामिल नहीं थे, इसलिए कोर्ट ने अब उन्हें बिना प्रोसेस फीस के फ्रेश नोटिस जारी करने का आदेश दिया है.
4 अगस्त को होगा महासंग्राम
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस याचिका से जुड़े सभी दस्तावेज और सामग्रियां अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे अपना पक्ष रख सकें. कोर्ट ने कड़े शब्दों में साफ कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. अब इस पूरे मामले की अगली बड़ी और निर्णायक सुनवाई 4 अगस्त को होने जा रही है, जहां न्यायमित्र राजदीपा बेहूरा और सभी पक्षकार अपनी अंतिम दलीलें पेश करेंगे.
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