राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए NSUI के विरोध प्रदर्शन के बाद से दिल्ली पुलिस एक बार फिर तीखे सवालों के घेरे में आ गई है. इस पूरे हंगामे और कथित पुलिस बर्बरता के बीच एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में छाया हुआ है, महिला कांस्टेबल चंचल यादव. सोशल मीडिया से लेकर 10 जनपथ तक गूंज रहे इस मामले में चंचल यादव वही पुलिसकर्मी हैं, जिन पर NSUI की राष्ट्रीय सचिव और पीड़ित नेत्री रितु बराला ने सबसे गंभीर और डरावने आरोप लगाए हैं. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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कौन हैं कांस्टेबल चंचल यादव और क्या है पूरा मामला?
कांस्टेबल चंचल यादव दिल्ली पुलिस में तैनात एक महिला कर्मी हैं, जिनकी ड्यूटी कनॉट प्लेस (CP) इलाके के आसपास सुरक्षा और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए लगाई गई थी. घटना वाले दिन जब NSUI के कार्यकर्ता 'वोट चोरी' और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था. प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में भरकर थाने ले जाया जा रहा था. इसी दौरान बस के अंदर NSUI नेत्री रितु बराला और कांस्टेबल चंचल यादव के बीच तीखी झड़प हुई, जो देखते ही देखते हिंसक हो गई.
चंचल यादव पर क्या हैं गंभीर आरोप?
पीड़ित नेत्री रितु बराला ने हमारे संवाददाता से बातचीत में कांस्टेबल चंचल यादव पर कई अमानवीय और गंभीर आरोप लगाए हैं:
बस के अंदर मारपीट और गला दबाना: रितु का आरोप है कि बस के अंदर कांस्टेबल चंचल यादव अत्यधिक आक्रामक हो गईं. जब उन्होंने विरोध किया, तो चंचल यादव ने उन्हें धक्का देकर पीछे की सीट पर गिरा दिया और उनका गला जोर से दबाया.
कपड़े फाड़ने और बाल खींचने के आरोप: पीड़ित ने आरोप लगाया कि कांस्टेबल ने उनके बाल पकड़कर पूरी बस में धक्का-मुक्की की, उनके चेहरे और आंखों के पास नाखूनों से खरोंचा, और जानबूझकर उनका सलवार-कमीज फाड़ दिया.
कान की बाली अंदर धंसने का दावा: रितु के अनुसार, मारपीट के दौरान जब उन्हें जूतों से और पैरों से पीटा गया, तो जूते की रगड़ से उनके कान की बाली उनके कान के अंदर घुस गई, जिसे बाद में लेडी हार्डिंग अस्पताल में डॉक्टरों ने ऑपरेशन या प्रक्रिया के जरिए बाहर निकाला.
थाने से अचानक हटाए जाने पर उठे सवाल
मामला तब और गरमा गया जब प्रदर्शनकारी और NSUI कार्यकर्ता कनॉट प्लेस थाने के बाहर जुटने लगे. रिपोर्ट्स और बयानों के मुताबिक, जब थाने के बाहर भीड़ बढ़ने लगी, तो स्थिति को भांपते हुए आरोपी कांस्टेबल चंचल यादव और एक अन्य महिलाकर्मी (सोनिका) को चुपचाप दूसरी गाड़ी से वहां से हटाकर कहीं और भेज दिया गया.
पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि पुलिस ने इस मामले को दबाने के लिए तुरंत मेडिकल (MLC) करवाने में भी टालमटोल की. हालांकि बाद में लेडी हार्डिंग अस्पताल में रितु बराला का मेडिकल (MLC) कराया गया. मेडिकल रिपोर्ट में पैरों पर सूजन, पीठ और कमर के पास कई जगह अंदरूनी चोटों की पुष्टि हुई है. साथ ही, मारपीट के कारण उनके दाहिने कान के सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ा है.
कार्रवाई की मांग
अब इस मामले में न केवल पीड़ित नेत्री बल्कि उनके परिवार और छात्र संगठन द्वारा भी यह मांग की जा रही है कि ड्यूटी के नाम पर इस तरह की 'गुंडागर्दी' करने वाली कांस्टेबल चंचल यादव और संबंधित थाना अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पुलिस विभाग की छवि पर लगे इस दाग को धोया जा सके और भविष्य में ऐसा बर्ताव किसी के साथ न हो.
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