नीट पेपर लीक और देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को बैकफुट पर लाने के बाद अब 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के चुनावी राजनीति में उतरने की चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP के भविष्य और चुनाव लड़ने की अटकलों पर संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने खुलकर जवाब दिया है और आगे की पूरी रणनीति स्पष्ट कर दी है.
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तत्काल चुनाव लड़ने की संभावना खारिज, राष्ट्रव्यापी दौरे की तैयारी
एक टीवी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में जब सौरभ दास से पूछा गया कि क्या इतना बड़ा छात्र आंदोलन चलाने के बाद CJP मुख्यधारा की राजनीति और चुनावों में कदम रखेगी, तो उन्होंने फिलहाल चुनाव लड़ने की बात से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अभी के लिए उनका फोकस बिल्कुल साफ है और वे इस आंदोलन को देश के अंतिम छोर तक तथा जमीनी स्तर पर लेकर जाएंगे. इसके लिए संगठन के सदस्य पूरे भारत का दौरा करेंगे और देश के युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करेंगे.
राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन और भावी जनाधार
सौरभ दास भले ही अभी तुरंत राजनीतिक दल बनाने या चुनाव लड़ने की बात से इनकार कर रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन ने भविष्य में राजनीतिक विकल्प बनने के दरवाजे बंद नहीं किए हैं. विश्लेषकों के अनुसार, CJP पहले देशभर के युवाओं को अपने साथ जोड़कर एक बड़ा जनाधार तैयार कर रही है ताकि देश की नीतियों और सार्वजनिक फैसलों के केंद्र में युवाओं से जुड़े मुद्दों को मजबूती से रखा जा सके.
संस्थापक अभिजीत दिपके का संदेश और प्रमुख मांगें
वहीं CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने साफ कहा है कि केवल विरोध प्रदर्शन खत्म होने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह तो महज एक शुरुआत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी को अभी एक लंबा सफर तय करना है. इसके साथ ही अभिजीत दिपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा पीड़ित परिवारों के लिए 1 करोड़ के मुआवजे और छात्रों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से दोहराया है.
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