राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेताओं पर शिकंजा कसता जा रहा है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंद से राजौरी गार्डन स्थित दफ्तर में करीब 4 घंटे तक मैराथन पूछताछ की है. इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने नेताओं के सामने 70 तीखे सवालों की झड़ी लगा दी.
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दो अलग-अलग FIR और प्रतिबंधित इलाके में घुसने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई 13 अक्टूबर की घटना से जुड़ी दो अलग-अलग एफआईआर के तहत की गई है. शुरुआती जांच क नॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में दर्ज हुई थी, जिसे बाद में संवेदनशीलता को देखते हुए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया. पुलिस का आरोप है कि सीजेपी नेताओं ने जंतर-मंतर के डी-नोटिफाइड यानी प्रतिबंधित इलाके में अवैध रूप से प्रवेश किया था. आरोप है कि वे निजी संपत्तियों के रास्तों से होकर अंदर दाखिल हुए और सरकार द्वारा लगाई गई निषेधाज्ञा व सुरक्षा प्रतिबंधों का उल्लंघन किया.
इन चार मुख्य बिंदुओं पर घिरे नेता
सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर पूछताछ की:
1. प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना इजाजत घुसने की प्लानिंग किसने बनाई थी?
2. निजी संपत्तियों का इस्तेमाल करके अंदर दाखिल होने का रूट प्लान किसका था?
3. इस विरोध प्रदर्शन के मुख्य आयोजक कौन थे और समर्थकों को कैसे जुटाया गया?
4. सुरक्षा नियमों की जानकारी होने के बावजूद कानून का उल्लंघन क्यों किया गया?
दावा किया जा रहा है कि इनमें से कई संवेदनशील सवालों और सीक्रेट रूट प्लान को लेकर नेताओं ने या तो गोलमोल जवाब दिए या फिर चुप्पी साध ली.
"कानून और जांच में पूरा सहयोग करेंगे" - आशुतोष रांका
4 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद बाहर आने पर CJP नेता आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने इसे एक रूटीन जांच प्रक्रिया बताया और कहा, "हमने पहले भी कहा था और आज भी कह रहे हैं कि कानून और जांच में हम पूरी तरह से सहयोग करेंगे. देश में कहीं भी तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं होना चाहिए. हमें उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और हम पुलिस का साथ देंगे."
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