देश के युवाओं और छात्रों के अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने सरकार को फिर चेतावनी दी है कि यदि 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, तो देश का युवा एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा.CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर, सोशल मीडिया पर हटाए जा रहे वीडियो और आंदोलन से जुड़े तमाम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी है. आइए विस्तार से जानते है पूरा मामला.
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25 जुलाई के वादे को निभाए सरकार
आशुतोष रांका ने बातचीत में 25 जुलाई को सरकार के साथ हुए समझौते या वादे का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों और आयोजकों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने और भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई न करने का भरोसा दिया था. हालांकि, सोशल मीडिया पर युवाओं के माफी मांगने वाले वीडियो और लगातार हो रही कार्रवाइयों को लेकर उन्होंने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सरकार को अपने वादे का सम्मान करना चाहिए और किसी भी प्रदर्शनकारी को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.
मांगें न मानने पर दोबारा आंदोलन का ऐलान
सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए रांका ने कहा कि देश का युवा अब किसी के डराने-धमकाने से डरने वाला नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपने किए वादों से पीछे हटती है या युवाओं पर दर्ज मामलों को वापस नहीं लेती, तो CJP फिर से बड़ा आंदोलन शुरू करेगी और युवा सड़कों पर उतरेंगे. उन्होंने कहा कि इसे चेतावनी समझा जाए या फिर अनुरोध, लेकिन वादों पर खरा उतरना ही होगा.
जश्न वाले वायरल वीडियो पर दी सफाई
हाल ही में सोशल मीडिया पर CJP के लोगों द्वारा जीत और इस्तीफे का जश्न मनाते हुए कुछ वीडियो वायरल हुए थे. इस पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि 57 दिनों तक जंतर-मंतर पर चप्पलें घिसने और भारी व्यक्तिगत व पेशेवर कुर्बानियां देने के बाद अगर युवाओं के इतने छोटे आंदोलन ने 12 साल पुरानी सत्ता को अपनी बात मानने पर मजबूर कर दिया है, तो यह एक बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जीत हासिल करने के बाद खुशी मनाना या सेलिब्रेट करना पूरी तरह से जायज है.
'पेपर लीक सुलझाने में लगाएं अपनी ऊर्जा'
प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं से संवाद साधने और रील्स जारी करने पर तंज कसते हुए रांका ने कहा कि युवाओं को बच्चों की तरह ट्रीट करने की बजाय वयस्कों की तरह मानकर उनसे सीधी बातचीत की जानी चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया से वीडियो हटाए जाने और लोगों को जेल में डाले जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार जितनी ऊर्जा एफआईआर दर्ज करने या वीडियो डिलीट कराने में लगा रही है, यदि उसकी 10 प्रतिशत ऊर्जा भी देश में पेपर लीक जैसी वास्तविक समस्याओं को सुलझाने में लगाई जाए, तो इससे देश के युवाओं का भी भला होगा और सरकार की साख भी बचेगी.
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