दिल्ली की भीषण गर्मी और पानी की किल्लत से जूझ रहे लाखों दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. दिल्ली सरकार ने अपनी बोरवेल पॉलिसी में एक ऐतिहासिक बदलाव करने का फैसला लिया है. अब दिल्ली में घरेलू बोरवेल लगवाना कोई मुश्किल काम नहीं होगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में इस नई नीति का ऐलान किया है, जिससे अब आम जनता को बोरवेल के लिए लंबी कागजी कार्रवाई और दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी.
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बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे मिलेगी परमिशन
अब तक दिल्ली में बोरवेल की अनुमति लेना एक बेहद जटिल प्रक्रिया थी, जिसमें अक्सर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती थीं. नई पॉलिसी के तहत अब जो भी व्यक्ति घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन करेगा, उसे सरकार द्वारा परमिशन दी जाएगी. जल मंत्री ने साफ किया कि 'नो' (No) कहने का सिस्टम अब खत्म कर दिया गया है. हालांकि, इसके लिए आवेदकों को एक निर्धारित सरकारी शुल्क देना होगा. सरकार का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों और भ्रष्टाचार को खत्म करना है, ताकि लोग वाजिब फीस देकर कानूनी तरीके से पानी का कनेक्शन ले सकें.
बिना अनुमति वाले बोरवेल पर होगी सख्त कार्रवाई
नई नीति में जहां राहत दी गई है, वहीं नियमों के उल्लंघन पर कड़े प्रावधान भी किए गए हैं. सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी बोरवेल बिना वैध अनुमति के चलते पाए जाएंगे, उन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसलिए नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे नई व्यवस्था के तहत आवेदन करें और कानूनी रूप से बोरवेल लगवाएं.
दिल्ली को मिलेगा 36 MGD अतिरिक्त पानी
सरकार ने केवल व्यक्तिगत बोरवेल ही नहीं, बल्कि सामुदायिक स्तर पर भी बड़े कदम उठाए हैं. विधानसभा में जानकारी दी गई कि पूरी दिल्ली में 230 नए सरकारी बोरवेल लगाने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं. इससे दिल्ली को प्रतिदिन लगभग 36 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) अतिरिक्त पानी मिलेगा. जल मंत्री का दावा है कि इस कदम से गर्मी के मौसम में होने वाले पानी के हाहाकार पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी. जैसे ही यह नई पॉलिसी पूरी तरह से लागू होती है, दिल्ली के लाखों घरों को पानी की किल्लत से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
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