हाल ही में हुए दिल्ली इमारत हादसे के बाद अगर आपको लगता है कि इलाके के बाकी हॉस्टल और पीजी सबक सीख चुके हैं, तो आप गलत हैं. हादसे वाली जगह से चंद कदम की दूरी पर आज भी सैकड़ों छात्रों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है. 'Hostel Daze' नाम की एक प्राइवेट कंपनी इसी इलाके में कई प्रॉपर्टीज चला रही है, जहां सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाना एक आम बात बन चुकी है.
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ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए ये चौंकाने वाले हालात बताते हैं कि हादसे से महज 70-80 मीटर दूर बनी इन इमारतों में छात्र किन खौफनाक स्थितियों में रहने को मजबूर हैं:
लोहे का बंद गेट और 2 फीट का 'रास्ता'
हादसे वाली जगह से कुछ ही दूरी पर मौजूद Hostel Daze की पहली प्रॉपर्टी का नजारा किसी को भी डरा सकता है. पूरी इमारत में अंदर आने और बाहर जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है. हद तो यह है कि यह रास्ता महज 2 फीट चौड़ा है. आपात स्थिति में अगर यहां कोई अनहोनी हो जाए, तो भगदड़ मचना तय है. सोने पर सुहागा यह कि मुख्य निकास को लोहे के भारी गेट से पूरी तरह बंद करके रखा गया है. हॉस्टल के बाहर बिजली के तारों का ऐसा मकड़जाल फैला है, जो बिना किसी देखरेख के हवा में झूल रहा है.
नियम-कायदों को अंगूठा दिखाती 5 मंजिला इमारतें
हादसे वाली जगह से 100 मीटर दूर कंपनी की दूसरी प्रॉपर्टी का हाल भी अलग नहीं है. नियमों के मुताबिक इस इलाके में 3 मंजिल से ज्यादा ऊंची इमारतें बनाने की इजाजत ही नहीं है. इसके बावजूद यहां धड़ल्ले से 5-5 मंजिलों का अवैध निर्माण किया गया है. बाहर लगे बिजली के मीटरों के पास खुले तार सीधे खतरे को न्योता दे रहे हैं.
छात्रों की मजबूरी, मकान मालिकों की तिजोरी
पढ़ाई की उम्मीद लेकर दिल्ली आने वाले युवाओं से हर महीने मोटा किराया वसूला जा रहा है. लेकिन इस भारी-भरकम रकम के बदले उन्हें जो मिल रहा है, वह है- सफोगेशन, हादसों का डर और असुरक्षा. एमसीडी और स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह खेल साफ इशारा करता है कि जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए, तब तक शायद जिम्मेदार लोग अपनी नींद से जागने वाले नहीं हैं.
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