साल 2012 में निर्भया के साथ जो हुआ वो याद है न. तब हमने और आपने मिलकर सड़कें जाम की थीं, मोमबत्तियां जलाई थीं और कसम खाई थी कि अब दोबारा ऐसा कभी नहीं होने देंगे, लेकिन 14 साल बाद भी हमारे देश में क्या बदल गया, कुछ भी नहीं. एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली के पास एक 16 साल की बच्ची के साथ वही खौफनाक दास्तान दोहराई गई. एक 11वीं की छात्रा, जो सिर्फ अपने घर जाना चाहती थी. चलती हुई स्लीपर बस में, रात के अंधेरे में, 47 किलोमीटर तक दरिंदगी का शिकार होती रही और सबसे दर्दनाक बात जानते हैं क्या है? रास्ते में पुलिस की गाड़ियां भी थीं, बैरिकेड्स भी थे, लेकिन किसी को कुछ नहीं दिखा.
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अब इस घटना पर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके का रिएक्शन सामने आया है. उन्हों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाते हुए एक वीडियो जारी किया है. उस वीडियो में उन्होंने क्या कहा- 'जब असल में किसी अपराध को अंजाम दिया जा रहा होता है तो दिल्ली पुलिस गायब रहती है. ये तभी सामने आते हैं जब उन्हें बच्चों पर हमला करना होता है.
वहीं कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा कि '50 किलोमीटर तक चलती बस में हैवानियत होती रही और दो राज्यों की पुलिस सोती रही. यह घटना बताती है कि 'डबल इंजन' सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है. वहीं के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया.
सीपीआई नेता एनी राजा ने कहा कि 'दिल्ली पुलिस की मुख्य जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा है, लेकिन उनका इस्तेमाल दूसरे कामों में किया जा रहा है.
बीजेपी और प्रशासन का पक्ष
दूसरी तरफ, बीजेपी नेता और मंत्री प्रवेश वर्मा ने पुलिस का बचाव किया. उन्होंने कहा कि 'हमें यह भी देखना चाहिए कि पुलिस ने कितनी जल्दी एक्शन लेकर आरोपियों को पकड़ा है. इसके साथ ही जनता को भी जागरूक रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को देने की जरूरत है.' वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है.
क्या है पूरा मामला "
ये घटना है 4 अगस्त की. एक 16 साल की नाबालिग छात्रा परी चौक पर अकेली खड़ी बस का इंतजार कर रही थी. तभी वहां एक स्लीपर बस आकर रुकती है. बस में केवल दो लोग थे, ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप. दरअसल, ये बस किसी खराबी की वजह से ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप में ठीक होने आई थी. मरम्मत के बाद ड्राइवर और कंडक्टर खाली बस लेकर साउथ दिल्ली की तिमारपुर पार्किंग लौट रहे थे. परी चौक पर उस बच्ची को अकेला खड़ा देख कंडक्टर ने उससे पूछा कि कहां जाना है. लड़की ने नोएडा सेक्टर-63 जाने की बात कही. कंडक्टर ने उसे झांसा दिया कि बस वहीं जा रही है और उसे अंदर बैठा लिया. उस वक्त उस बच्ची को क्या पता था कि जिस बस में वो सुरक्षित महसूस करके चढ़ रही है, वही उसके लिए उसकी सबसे बड़ी गलती बन जाएगी.
अंदर नहीं थी कोई सवारी
बस में चढ़ते ही बच्ची ने देखा कि अंदर कोई सवारी नहीं है. बस जैसे ही आगे बढ़ी, कंडक्टर और ड्राइवर ने उस मासूम के साथ बदसुलूकी शुरू कर दी. लड़की ने विरोध किया, चिल्लाने की कोशिश की तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई. ग्रेटर नोएडा से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट तक. करीब 47 किलोमीटर के इस लंबे सफर में चलती बस में उस मासूम के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया."
हैवानियत को अंजाम देने के बाद, देर रात दरिंदों ने उस बच्ची को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर सड़क किनारे फेंक दिया और वहां से भाग गए. दोनों आरोपी तिमारपुर पार्किंग पहुंचे और बेखौफ होकर आराम करने लगे, जैसे कुछ हुआ ही न हो. लेकिन उस 16 साल की बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी. इतनी बड़ी त्रासदी सहने के बाद भी वह सीधा कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस को पूरी आपबीती सुनाई. सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन में आई. पीड़िता का तुरंत मेडिकल टेस्ट कराया गया. इसके बाद पुलिस ने अपहरण, मारपीट और सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में FIR दर्ज की.
कोतवाली ACP शंकर बनर्जी की देखरेख में एक स्पेशल टीम बनाई गई. पुलिस ने रास्ते के CCTV फुटेज खंगाले. फुटेज के आधार पर बस का नंबर ट्रैक किया गया और पुलिस तिमारपुर पार्किंग पहुंची, जहां से ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को धर दबोचा गया और बस को जब्त कर लिया गया है. पुलिस ने देर रात ही बच्ची के परिवार को दिल्ली बुलाया. महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उसकी काउंसलिंग करवाई गई और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे परिवारवालों को सौंप दिया गया. पुलिस अब आरोपियों का पोटेंसी टेस्ट करवा चुकी है और बस से DNA सैंपल इकट्ठे किए गए हैं ताकि कोर्ट में मजबूत सबूत पेश किए जा सकें."
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