Delhi Tram Service Chandni Chowk: अगर आप भी दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक, लाल किला, चावड़ी बाजार या जामा मस्जिद घूमना पसंद करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद बड़ी खुशखबरी है. लगभग 61 साल के लंबे इंतजार के बाद पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक सड़कों पर एक बार फिर ट्राम दौड़ती हुई नजर आने वाली है. हालांकि, इस बार इसका अवतार बिल्कुल अलग और हाईटेक होगा, क्योंकि दिल्ली में देश की पहली 'ट्रैकलेस ट्राम' (बिना पटरी वाली ट्राम) शुरू करने की तैयारी की जा रही है.
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बिना पटरी और बिना तार के कैसे चलेगी यह ट्राम?
पारंपरिक ट्राम को चलाने के लिए सड़कों पर लोहे की पटरियां बिछानी पड़ती हैं और ऊपर बिजली के भारी-भरकम तार लगाने पड़ते हैं. पुरानी दिल्ली की बेहद संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों में पटरियां बिछाना व्यावहारिक रूप से काफी मुश्किल था. इसलिए सरकार ने इसका स्मार्ट सॉल्यूशन निकालते हुए 'ट्रैकलेस ट्राम' का मास्टर प्लान तैयार किया है. हाल ही में इंद्रप्रस्थ विकास पुनर्विकसित निगम की बैठक में इस प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई. यह ट्राम पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होगी, जो इसकी छत पर लगी लिथियम-आयरन (Lithium-ion) बैटरी से चलेगी. इससे दिल्ली में प्रदूषण का भी कोई खतरा नहीं रहेगा.
पुरानी दिल्ली की बनावट के हिसाब से खास होगा डिजाइन
इस नई ट्राम का डिजाइन पुरानी दिल्ली के रास्तों और सड़कों के हिसाब से तैयार किया जाएगा. यह पारंपरिक ट्राम के मुकाबले छोटी, पतली और आसानी से मुड़ने वाली होगी ताकि चांदनी चौक के तीखे मोड़ों और तंग गलियों से भी बिना किसी ट्रैफिक जाम के आसानी से निकल सके. पैदल चलने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसकी स्पीड को पूरी तरह से नियंत्रित रखा जाएगा.
जानिए क्या होगा इसका रूट और कहां होगी पार्किंग
प्रस्तावित प्लान के अनुसार, यह ट्रैकलेस ट्राम जामा मस्जिद, चावड़ी बाजार, चांदनी चौक, लाल किला और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख ऐतिहासिक व टूरिस्ट स्पॉट्स को आपस में जोड़ेगी. रात के समय इन ट्रामों को अंबेडकर डीटीसी डिपो में पार्क करने का प्रस्ताव रखा गया है.
1908 में शुरू हुई थी पहली ट्राम, 2014 का अटका प्रोजेक्ट अब होगा पूरा
ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में पहली ट्राम सेवा 6 मार्च 1908 को शुरू की गई थी, जिसे दिसंबर 1963 में बंद कर दिया गया था. इसके बाद साल 2014 में भी ट्राम सेवा दोबारा शुरू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन संकरी सड़कों पर पटरियां बिछाने की बड़ी चुनौती के कारण वह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका था. अब आधुनिक 'ट्रैकलेस' तकनीक ने उस सबसे बड़ी रुकावट को खत्म कर दिया है. पीडब्ल्यूडी (PWD) जल्द ही इसकी फिजिबिलिटी स्टडी शुरू करेगा, जिसके बाद इसके अंतिम रूट, सीटों की संख्या और किराए का फैसला किया जाएगा.
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