Creator Ajay Sharma Story: शहर की भागदौड़, भारी ट्रैफिक और प्रदूषण से परेशान होकर अक्सर लोग पहाड़ों की शांत वादियों में जाकर बसने का सपना देखते हैं. दिल्ली के कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी इस सपने को सच करने के लिए हिमाचल प्रदेश के मनाली का रुख किया था. लेकिन पहाड़ों में रहने की व्यावहारिक चुनौतियों के चलते महज 2 महीने के भीतर ही उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा. अजय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 50 से अधिक वीडियो साझा कर पहाड़ों की वास्तविक जिंदगी का सच उजागर किया है.
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23 मई को पहुंचे मनाली, लेकिन इन समस्याओं ने बढ़ाया दर्द
अजय शर्मा 23 मई 2026 को मनाली के पास स्थित सियाल गांव पहुंचे थे. उनका मकसद यह अनुभव करना था कि क्या पहाड़ों में रोजाना की जिंदगी छुट्टियों जैसी ही खुशनुमा होती है या नहीं. वहां रहते हुए उन्हें कई जमीनी समस्याओं का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी दिक्कत इंटरनेट नेटवर्क की आई, जो ऑनलाइन काम और वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए बड़ी रुकावट बन गई.
इसके अलावा, बेमौसम बारिश और मानसून के दौरान सड़कों का खराब होना बड़ी परेशानी साबित हुआ. रोजमर्रा के जरूरी सामान के लिए लंबी और खड़ी चढ़ाई चढ़ना शारीरिक रूप से काफी थका देने वाला होता था. खुद खाना पकाना और लंबे समय तक अकेले रहने से उन्हें अलगाव महसूस होने लगा.
दिल्ली के मुकाबले कितना रहा मनाली का बजट
खर्च और बजट की बात करें तो मनाली दिल्ली की तुलना में काफी किफायती साबित हुआ. अजय शर्मा मनाली में एक वन-बीएचके (1BHK) फ्लैट में किराए पर रहते थे.
कमरे का किराया: ₹14,000 प्रति महीना (जिसमें वाई-फाई और बिजली का बिल शामिल था).
राशन व किराना: करीब ₹3,500 प्रति महीना.
बाहर खाने का खर्च: हफ्ते में एक बार बाहर खाने पर लगभग ₹500 खर्च होते थे.
कुल मासिक खर्च: पूरे महीने का कुल खर्च लगभग ₹21,000 के आसपास रहा.
मनाली छोड़ते वक्त भावुक हुए अजय शर्मा
तमाम चुनौतियों के बावजूद मनाली से विदा लेते वक्त अजय शर्मा काफी भावुक दिखे. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि जिस अनजान जगह वे पहुंचे थे, वहां की सड़कें और पहाड़ धीरे-धीरे उनके घर जैसे बन गए थे.
अजय ने स्वीकार किया कि मनाली से दिल्ली वापस लौटकर दोबारा यहां के जीवन में ढलना आसान नहीं है. हालांकि, उनका मानना है कि जिंदगी में किसी नए अध्याय की शुरुआत के लिए पुराने अध्याय का समाप्त होना जरूरी होता है. यदि आप भी पहाड़ों में स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे हैं, तो खूबसूरत वादियों के साथ-साथ वहां की व्यावहारिक चुनौतियों को समझना भी बेहद जरूरी है.
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