Delhi Fire Safety New Rules: दिल्ली में पिछले दिनों मालवीय नगर अग्निकांड में 23 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद अब दिल्ली सरकार के बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने फायर सेफ्टी के लिए बड़ा फैसला लेने जा रही है. अब दिल्ली के सिर्फ बड़े मॉल्स या हाईराइज सोसाइटी ही नहीं बल्कि आपका अपना स्वतंत्र मकान, बिल्डर फ्लोर और यहां तक कि छोटा सा घर भी फायर सेफ्टी के कड़े नियमों के दायरे में आने वाला है.
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दरअसल, दिल्ली सरकार हर घर के लिए स्मोक डिटक्टर समेत चार बड़े काम जरूरी करने जा रही है. दिल्ली में आग के तांडव को रोकने के लिए रेखा गुप्ता सरकार अब दिल्ली के बिल्डिंग बाय लॉस में एक ऐतिहासिक संशोधन करने की तैयारी कर रही है. बता दें कि अब तक दिल्ली में सिर्फ 15 मीटर से ऊंची रिहाइशी इमारतों में ही स्मोक डिटक्टर या फायर हाइड्रेंट लगाना जरूरी होता था.
15 मीटर से कम ऊंचे मकान भी दायरे में
पुरानी ढिलाई का फायदा उठाकर लाखों स्वतंत्र मकान और छोटे अपार्टमेंट सुरक्षा नियमों से बच निकलते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अब 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले सभी मकानों को भी सुरक्षा के इस कड़े दायरे में लाया जा रहा है. दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद के मुताबिक इस नए प्रस्ताव के लागू होते ही दिल्ली के हर छोटे-बड़े घर के मालिकों को चार बड़े काम करने ही होंगे.
ये हैं वो 4 जरूरी नियम
सबसे पहला काम हर स्वतंत्र कोठी, घर और बिल्डर फ्लोर में स्मोक डिटक्टर लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा. दूसरा काम घरों में फायर हाइड्रेंट सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी. तीसरा किसी भी हादसे के वक्त सुरक्षित बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी एग्जिट बनाना होगा. चौथा काम भविष्य में बनने वाले मकानों में कम ज्वलनशील निर्माण सामग्री यानी कम आग पकड़ने वाले मटेरियल का इस्तेमाल करना होगा.
पुराने मकान मालिकों को 3 साल की राहत
सरकार की यह प्लानिंग सिर्फ नए बनने वाले मकानों के लिए ही नहीं है. अगर आपका मकान पुराना है और पहले से बना हुआ है तो भी आपको नियमों का पालन करना होगा. हालांकि सरकार पुरानी संपत्तियों के मालिकों को राहत देते हुए इन उपकरणों को लगाने के लिए अगले 3 वर्ष का समय देने पर विचार कर रही है. यानी 3 साल के अंदर दिल्ली के हर घर को फायर सेफ बनाना ही होगा.
बढ़ेगा आर्थिक बोझ और कंस्ट्रक्शन कॉस्ट
इस फैसले से मकानों की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट पर भी थोड़ा असर पड़ सकता है. इस बड़े नीतिगत फैसले को लेकर गृह मंत्री आशीष सूद ने साफ किया है कि सरकार मौजूदा नियमों की गहन समीक्षा कर रही है और जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी कानूनी व नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं. हालांकि इस कदम से गरीब और निम्न आय वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
झुग्गी झोपड़ियों के लिए सरकार का प्लान
आर्थिक बोझ की आशंका पर सरकार का कहना है कि झुग्गी झोपड़ी बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में सरकार की प्राथमिकता फायर सर्विसेज की पहुंच और रिस्पांस टाइम को बेहतर बनाने पर होगी. आग लगने के बाद राहत कार्य करने के पुराने ढर्रे को पूरी तरह बदलने के लिए दिल्ली सरकार फायर सर्विसेज के बुनियादी ढांचे को भी हाईटेक करने जा रही है.
50 साल पुराना कम्युनिकेशन सिस्टम बदलेगा
आशीष सूद ने बताया कि विभाग का मौजूदा वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम लगभग पांच दशक यानी 50 साल पुराना हो चुका है जिसे अब पूरी तरह से बदलकर नया अत्याधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है और इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं. साफ है कि मालवीय नगर जैसी बड़ी त्रासदियों से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार अब तकनीक के दम पर रिहाइशी संपत्तियों को पूरी तरह सुरक्षित करने के मूड में है.
आग की शुरुआती चेतावनी से बचेंगी जानें
सरकार का मानना है कि अगर घर में स्मोक डिटक्टर होगा तो आग की शुरुआती चेतावनी मिल जाएगी और 23 लोगों की मौत जैसा दर्दनाक हादसा दोबारा नहीं दोहराया जाएगा. सरकार के इस फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या हर घर में स्मोक डिटक्टर अनिवार्य होना चाहिए? हमें कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें.
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