दिल्ली-गुरुग्राम वालों की लॉटरी! अब मिनटों में तय होगा घंटों का सफर, 38,000 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

दिल्ली, गुरुग्राम और बावल के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए 38,000 करोड़ के रैपिड रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है जो 2032 तक बनकर तैयार होगा. यह 93 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर सराय काले खां से शुरू होकर कुल 13 स्टेशनों को जोड़ेगा, जिससे घंटों का सफर मिनटों में तय होगा और भीषण जाम से राहत मिलेगी.

यात्रियों के लिए बड़ी खबर
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विजय नेगी

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दिल्ली से गुरुग्राम, धारूहेड़ा और बावल के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. साहिबाबाद-मेरठ रूट के बाद अब नमो भारत (रैपिड रेल) के नए कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली गई है. यह नया प्रोजेक्ट न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को वर्ल्ड क्लास लग्जरी सफर का अनुभव भी कराएगा.

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93 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर

दिल्ली-गुरुग्राम-बावल कॉरिडोर असल में दिल्ली-अलवर रूट का एक बेहद अहम हिस्सा है. संशोधित रिपोर्ट (Revised Report) के मुताबिक, इस कॉरिडोर की कुल लंबाई अब 93.12 किलोमीटर होगी. इसकी शुरुआत दिल्ली के सराय काले खां से होगी, जहां से यह ट्रेन आईएनए (INA), मुनीरका और एरोसिटी जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी.

13 स्टेशन और अंडरग्राउंड सफर

इस पूरे रूट पर कुल 13 स्टेशन बनाए जाएंगे. खास बात यह है कि इनमें से 8 स्टेशन जमीन के नीचे (Underground) होंगे और 5 स्टेशन एलिवेटेड होंगे. दिल्ली के हिस्से में तीन अंडरग्राउंड स्टेशन- आईएनए, मुनीरका और एरोसिटी आएंगे. हरियाणा में प्रवेश करते ही यह ट्रेन नेशनल हाईवे-48 के साथ दौड़ेगी और साइबर सिटी, इफ्को चौक, राजीव चौक, खेड़कीदौला, मानेसर, पंचगांव और धारूहेड़ा होते हुए बावल तक जाएगी.

38,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब ₹38,000 करोड़ आंकी गई है. इसमें दिल्ली सरकार का हिस्सा 3,261 करोड़ रुपये होगा. अच्छी खबर यह है कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों ने इस प्रोजेक्ट को अपनी मंजूरी दे दी है. इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य साल 2032 तक रखा गया है.

यात्रियों को क्या होगा फायदा?

  • जाम से मुक्ति: गुरुग्राम के राजीव चौक और इफ्को चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में अब नमो भारत की रफ्तार दिखेगी, जिससे घंटों के जाम से निजात मिलेगी.
  • इंडस्ट्रियल हब को कनेक्टिविटी: मानेसर और धारूहेड़ा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए यह कॉरिडोर वरदान साबित होगा.
  • प्रदूषण में कमी: सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम होने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आने की उम्मीद है.

भविष्य में इस कॉरिडोर को राजस्थान के अलवर तक ले जाने की भी योजना है, जिससे दिल्ली और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी और भी मजबूत हो जाएगी.

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