IVF से जन्मे जुड़वा बच्चों के चेहरे देखकर कपल को हुआ शक... DNA टेस्ट कराया तो रिपोर्ट देख सभी रह गए सन्न, कैमरे सुनाई आपबीती

Delhi IVF center shocking controversy: दिल्ली के एक दंपति ने IVF के जरिए जुड़वा बच्चों का स्वागत किया, लेकिन कुछ महीनों बाद कराए गए DNA टेस्ट ने सबकुछ बदल दिया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि बच्चे जैविक रूप से दोनों में से किसी के नहीं हैं. अब मामला अदालत तक पहुंच चुका है और जांच की मांग तेज हो गई है.

दिल्ली IVF सेंटर का खौफनाक खेल
दिल्ली IVF सेंटर का खौफनाक खेल

अंशुल सिंह

follow google news

Delhi IVF Case News: देश की राजधानी दिल्ली से नामी अस्पतालों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर देने वाला एक मामला सामने आया है. दिल्ली के एक दंपत्ति को IVF ट्रीटमेंट के जरिए जुड़वा (ट्विंस) बच्चे हुए. लेकिन जन्म के कुछ महीनों बाद एक ऐसा सच सामने आया, जिससे इनके मां बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई. दरअसल, DNA टेस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिन बच्चों को मां ने अपनी कोख से जन्म दिया, बायोलॉजिकली वो बच्चे उन दोनों में से किसी के हैं ही नहीं. क्या है पूरा मामला और क्याें परिवार ने बच्चों का DNA टेस्ट करवाया. चलिए जानते हैं इस खबर में...

Read more!

क्यों करवाया DNA टेस्ट?

दरअसल, पीड़ित पिता ने दिल्ली तक से बातचीत में बताया कि उन्होंने दिल्ली के 'एससीआई IVF हॉस्पिटल' (SCI IVF Hospital) से अपना ट्रीटमेंट शुरू करवाया था. उनकी गाइनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर रितु गर्ग ने उन्हें वहां रेफर किया था, जहां उनकी मुलाकात डॉक्टर शिवानी सचदेव गौर से कराई गई थी. ट्रीटमेंट सफल रहा और मई 2025 में एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया.

हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आने के बाद माता-पिता ने गौर किया कि उनके छोटे बच्चे के नैन-नक्श (फीचर्स) बिल्कुल नॉर्थ-ईस्ट के बच्चों जैसे दिख रहे हैं. शक होने पर जब उन्होंने बच्चों का DNA टेस्ट करवाया तो जो रिपोर्ट आई उसने सबको सुन्न कर दिया. रिपोर्ट में बच्चों का मेटरनिटी और पैटर्निटी दोनों ही टेस्ट पूरी तरह से फेल हो गया. यानी ना तो वो बच्चा उस मां का था जिसने उसे जन्म दिया और ना ही उस पिता का जिसका स्पर्म लिया गया था.

प्रशासन की ढिलाई: 3 महीने तक नहीं दर्ज हुई FIR

इस संवेदनशील मामले में तंत्र और पुलिस प्रशासन का जो रवैया रहा, वह और भी डराने वाला है. पीड़ित पिता का आरोप है कि डीएनए टेस्ट फेल होने के बाद वे 3 महीने तक पुलिस थाने के चक्कर काटते रहे, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की. थक-हारकर उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. कोर्ट के कड़े आदेश के बाद 31 मार्च 2026 को इस मामले में एफआईआर दर्ज हो सकी. लेकिन लूपहोल देखिए कि अगले ही दिन 1 अप्रैल को जांच पर स्टे लगा दिया गया.

'हम रोज जी रहे हैं, रोज मर रहे हैं' - मां का छलका दर्द

कैमरे के सामने बिलखते हुए पीड़ित मां ने बताया कि IVF की प्रक्रिया खुद में बेहद दर्दनाक होती है. इस कड़वे सच के सामने आने के बाद वे सदमे में चली गई थीं, उनका बीपी बढ़ गया और उन्हें डिप्रेशन की दवाइयां लेनी पड़ीं. उन्होंने रोते हुए कहा, "हम इन बच्चों को पूरा प्यार दे रहे हैं, लेकिन हमारे अपने सगे बच्चे कहाँ हैं? और जिन बच्चों को हमने पाल रखा है, उनके असली जेनेटिक माता-पिता कौन हैं? परमात्मा ऐसा दिन किसी को न दिखाए."  मां ने कहा कि 'हम रोज जी रहे हैं, रोज मर रहे हैं'. 

फिलहाल अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को हॉस्पिटल के एम्ब्रियोलॉजी शीट्स और सभी जरूरी दस्तावेज तुरंत सीज करने के आदेश दिए हैं. पिछले 5 महीनों से इंसाफ के लिए भटक रहा यह परिवार आज सिर्फ एक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है ताकि उन्हें उनके सगे बच्चे वापस मिल सकें.

यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में मौसम ने फिर बदली चाल... जानिए 14 जून को किन इलाकों में छाएंगे, IMD ने जारी किया अपडेट

    follow google news