दिल्ली अग्निकांड: जान पर खेलकर स्थानीय लोगों ने बचाई दर्जनों जिंदगियां, चश्मदीदों ने बयां किया रूह कंपा देने वाला मंजर

Delhi Fire Incident: दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दर्जनों लोगों को बचाया. चश्मदीदों ने बताया कैसे गद्दे बिछाकर लोगों को ऊपरी मंजिलों से सुरक्षित निकाला गया. हादसे में दम घुटने से कई मौतें हुईं, जबकि अवैध होटल संचालन, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

Malviya Nagar Fire
Malviya Nagar Fire

वैशाली

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देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक बेहद ही दर्दनाक और भयानक अग्निकांड की घटना सामने आई है. इस भीषण हादसे के दौरान जहां चारों तरफ चीख-पुकार और मौत का तांडव देखने को मिला, वहीं कुछ ऐसे जांबाज स्थानीय लोग भी सामने आए जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए दर्जनों लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया. इस अग्निकांड के 'अनसंग हीरोज' यानी असली नायकों ने कैमरे के सामने आकर उस खौफनाक मंजर की पूरी सच्चाई बयां की है कि कैसे उन्होंने प्रशासनिक मदद से पहले ही लोगों का रेस्क्यू करना शुरू कर दिया था.

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सुबह का वक्त और अचानक मची चीख-पुकार

चश्मदीद और स्थानीय निवासी मोहम्मद अनीश ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 8:40 बजे के आसपास की है. जब वह अपने कमरे में सो रहे थे, तभी उनके किराएदार ने आकर उन्हें आग लगने की सूचना दी. जब वह भागकर बाहर आए तो देखा कि बिल्डिंग के अंदर, जहां एक कैफे का निर्माण चल रहा था, हल्की-हल्की आग लगी हुई थी. होटल के अंदर फंसे लोग खिड़कियों के पास आकर लगातार हाथ पटक रहे थे और कांच तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मजबूत शीशा होने के कारण वे उसे तोड़ नहीं पा रहे थे. इसके बाद स्थानीय लोगों ने पीछे से पत्थर और रोड़े मारकर उन खिड़कियों के शीशों को तोड़ा ताकि अंदर फंसे लोग बाहर आ सकें.

गद्दे बिछाकर खिड़कियों से कुदाए गए लोग

हादसे का मंजर इतना भयावह था कि जान बचाने के लिए लोग ऊपर की मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए. चश्मदीदों के मुताबिक, सबसे पहले पहली मंजिल से एक शख्स नीचे कूदा जो बिजली के तारों में लचकते हुए जमीन पर गिरा, जिससे उसके पैर में हल्का फ्रैक्चर आया लेकिन वह उठकर चल दिया. इसके बाद हालात को भांपते हुए स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाई और पास ही मौजूद एक रजाई-गद्दे की दुकान से तुरंत ढेर सारे गद्दे मंगवाए. 

लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछा दिए, जिसके बाद तीसरी और चौथी मंजिल से लोगों को नीचे कुदाया गया. इन गद्दों की मदद से एक बच्चे, तीन पुरुषों और पांच महिलाओं की जान बचाई गई, जो सुरक्षित नीचे लैंड कर गए. एक अन्य चश्मदीद तौसीफ खान ने बताया कि उन्होंने और अन्य लोगों ने मिलकर करीब छह से सात लोगों को इसी तरह गद्दे पर कुदाकर सुरक्षित बचाया.

बेसमेंट से निकलीं लाशें, दम घुटने से हुई मौतें

स्थानीय लोगों के अनुसार, होटल के भीतर केवल एक ही मुख्य दरवाजा था जो एंट्री और एग्जिट दोनों के लिए इस्तेमाल होता था. मुख्य दरवाजे पर भयंकर आग लगी होने के कारण कोई भी अंदर नहीं जा पा रहा था. जब फायर ब्रिगेड और पुलिस ने करीब 15 मिनट बाद पहुंचकर आग पर काबू पाया, तब लोग अंदर दाखिल हो सके. होटल के अंदर का मंजर बेहद खौफनाक था और चारों तरफ केवल काला धुआं और अंधेरा फैला हुआ था. 

लोगों ने बताया कि उन्होंने जब नीचे के बेसमेंट का ताला तोड़ा, तो वहां से पांच शव बरामद हुए. बेसमेंट में आग नहीं लगी थी, लेकिन वहां पूरी तरह से धुआं भर जाने के कारण लोगों का दम घुट गया. इसके अलावा ऊपर की मंजिलों से भी जो शव निकाले गए, उनमें से ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने और बुरी तरह झुलस जाने की वजह से हुई थी.

मैक्स अस्पताल के पास होने के चलते ठहरे थे विदेशी नागरिक

घटनास्थल पर मौजूद एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि इस हादसे में मरने और प्रभावित होने वाले लोगों में ज्यादातर विदेशी नागरिक शामिल थे. दरअसल, यह होटल मैक्स अस्पताल के बिल्कुल सामने स्थित था, जिसकी वजह से यहां अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके तीमारदार डे-टू-डे रूटीन के तहत रुकते थे. चश्मदीद ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से लोगों को ऊपर से नीचे गिरते देखा. 

इस दौरान एक नाइजीरियाई पति-पत्नी भी ऊपर से कूदे, जिसमें पत्नी की गर्दन में चोट आई जबकि पति सीधे गद्दे पर गिरा. चश्मदीदों ने भावुक होते हुए बताया कि कुछ व्हीलचेयर पर रहने वाले लाचार मरीज भी अपनी जान बचाने के लिए ऊपर से कूदने को मजबूर हुए, जो बेहद ही दर्दनाक और दिल दहला देने वाला अनुभव था. सिलेंडरों में ब्लास्ट के डर से स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए आसपास की चार अन्य सराउंडिंग बिल्डिंग्स को भी तुरंत खाली करवा लिया था.

प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की सरेआम धज्जियां

इस हादसे ने दिल्ली में चल रही बड़ी प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर कर दिया है. बताया जा रहा है कि इस होटल को सिर्फ छह कमरे बनाने के लिए बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएनबी) का लाइसेंस मिला हुआ था, लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध तरीके से इसमें 25 से भी ज्यादा कमरे बना दिए गए थे. चश्मदीदों ने बताया कि इस रिहायशी इलाके में इस तरह के करीब 50 होटल अवैध रूप से चल रहे हैं, जिन्होंने बेसमेंट में अवैध कमरे और तीन-तीन किचन बना रखे हैं. होटल में न तो कोई फायर अलार्म सिस्टम था और न ही कोई इमरजेंसी एग्जिट गेट. होटल की लिफ्ट और सीढ़ियां भी इतनी संकरी थीं कि अगर हड़बड़ाहट मचे तो लोग वैसे ही दबकर मर जाएं.

स्थानीय लोगों की मांग और सरकार पर गुस्सा

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने मुस्तैदी से काम किया और बहुत जल्द राहत कार्य शुरू किया, जिसकी स्थानीय लोगों ने तारीफ की. हालांकि, लोगों का गुस्सा दिल्ली सरकार और नागरिक प्रशासन पर साफ दिखाई दिया. स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार एसडीएम और डीएम को लिखित शिकायत दी थी और खुद जाकर मुलाकात भी की थी, लेकिन हमेशा उन्हें केवल आश्वासन मिला और उनकी आवाज दबा दी गई. 

लोगों ने बताया कि इन होटलों के मालिक यहां रहते भी नहीं हैं, बल्कि वे विदेशों में रहते हैं और यहां सिर्फ कमर्शियल एक्टिविटी से पैसा कमा रहे हैं. स्थानीय लोगों ने अब सरकार से पुरजोर मांग की है कि नियमों का उल्लंघन कर रिहायशी इलाकों में चल रहे ऐसे तमाम अवैध होटलों को तुरंत बंद किया जाए और भविष्य में इन्हें केवल सख्त फायर सेफ्टी नॉर्म्स और उचित लाइसेंस के साथ ही संचालित करने की अनुमति दी जाए.

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Delhi fire Update: इजाजत 6 कमरों की पर पर चल रहा था 25 कमरों में होटल, भीषण आग ने ली 21 की जान

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