दिल्ली मेट्रो, जिसे राजधानी की लाइफलाइन माना जाता है, वहां महिला सुरक्षा को लेकर साकेत जिला अदालत ने एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है. अदालत ने मेट्रो के अंदर एक महिला के साथ अश्लील हरकत और यौन उत्पीड़न करने वाले दोषी मोहम्मद ताहिर की सजा को न केवल बरकरार रखा है, बल्कि उसकी पुनर्विचार अपील को भी सिरे से खारिज कर दिया है. आइए विस्तार से जानते है पूरा मामला.
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क्या थी पूरी घटना?
यह मामला 27 मार्च 2021 की शाम का है, जब येलो लाइन पर एक मेट्रो ट्रेन साकेत और हौजखास स्टेशनों के बीच दौड़ रही थी. आरोपी मोहम्मद ताहिर ने ट्रेन के अंदर एक महिला के सामने खड़े होकर बेहद अश्लील हरकत (मास्टरबेट) शुरू कर दी. जब पीड़िता ने हिम्मत दिखाकर इसका विरोध किया, तो आरोपी रुका नहीं बल्कि उसने महिला के कंधे पर हाथ फेरकर बदसलूकी की. पीड़िता के शोर मचाने पर अन्य यात्रियों ने दखल दिया और बाद में आरोपी को ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया.
अदालत की सख्त टिप्पणी
एडिशनल सेशंस जज हरगुरिविंदर सिंह जग्गी की अदालत ने 9 मार्च को दिए अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है. अदालत ने माना कि मेट्रो जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर होने वाले ऐसे अपराध न केवल शारीरिक बल्कि गहरा 'मानसिक आघात' (Psychological Trauma) भी देते हैं.
सजा और कानूनी कार्रवाई
ट्रायल कोर्ट ने पहले ही आरोपी मोहम्मद ताहिर को तत्कालीन आईपीसी की धारा 354 और 354-ए (यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया था. आरोपी ने इस सजा को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन जज ने पीड़िता की गवाही को सच्चा मानते हुए और इमरजेंसी बटन दबाए जाने जैसे सबूतों के आधार पर सजा को बरकरार रखा. अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा के लिए और भी कड़े कदम उठाए जाएं ताकि कोई भी महिला सफर के दौरान खुद को असुरक्षित महसूस न करें.
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