उत्तर पश्चिमी दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डर पर रहने वाले लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो का Phase 4 एक बहुत बड़ी सौगात लेकर आ रहा है. रिठाला से सीधा हरियाणा के कुंडली तक प्रस्तावित नए मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण को लेकर एक बहुत बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है. इस 26 किलोमीटर लंबे रूट के निर्माण के लिए दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने वन विभाग से लगभग 3500 पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगी है.
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पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए करीब 3000 पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा. इस बड़ी मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस रूट का काम जमीन पर कब रफ्तार पकड़ेगा और यह कॉरिडोर कब तक आम जनता के लिए बनकर तैयार हो जाएगा.
रेड लाइन का ऐतिहासिक विस्तार और प्रोजेक्ट की लागत
दिल्ली मेट्रो की सबसे पुरानी और सबसे व्यस्त लाइनों में से एक 'रेड लाइन' का अब एक ऐतिहासिक विस्तार होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने साल 2024 में दिल्ली मेट्रो के चौथे फेज के तहत इस 27 किलोमीटर लंबे रिठाला-कुंडली कॉरिडोर को हरी झंडी दी थी. लगभग 6,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर गाजियाबाद के शहीद स्थल से शुरू होकर, रिठाला होते हुए सीधे हरियाणा के कुंडली तक पहुंचेगा. उत्तर पश्चिमी दिल्ली की कनेक्टिविटी की तस्वीर पूरी तरह बदलने के लिए इस पूरे रूट पर कुल 21 मेट्रो स्टेशन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है.
3493 पेड़ों को हटाने की चुनौती और ट्रांसप्लांटेशन का प्लान
इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए रास्ते में आ रहे पेड़ों को हटाना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. डीएमआरसी के प्रस्ताव के मुताबिक, इस पूरे रूट पर कुल 3493 पेड़ आ रहे हैं. राहत की बात यह है कि दिल्ली की सख्त ट्री प्लांटेशन पॉलिसी के तहत इनमें से अधिकांश पेड़ों को काटा नहीं जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा. इस पूरे रूट को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटकर प्रभावित होने वाले पेड़ों की पहचान की गई है, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो.
रूट के तीन खंडों में इस तरह शिफ्ट होंगे पेड़
इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत पेड़ों को हटाने और ट्रांसप्लांट करने के लिए रूट को तीन भागों में विभाजित किया गया है. पहले हिस्से यानी रिठाला से रोहिणी सेक्टर-34 तक कुल 1128 पेड़ चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 946 को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा और 182 पेड़ों को काटा जाएगा. दूसरे हिस्से यानी रोहिणी सेक्टर-34 से बवाना औद्योगिक क्षेत्र तक 1500 पेड़ों में से 1424 को प्रत्यारोपित किया जाएगा और सिर्फ 35 पेड़ काटे जाएंगे.
तीसरे हिस्से बवाना से दिल्ली-हरियाणा सीमा तक 906 पेड़ों की पहचान हुई है, जिनमें से 596 को शिफ्ट किया जाएगा और 310 पेड़ों को काटा जाएगा. ये पेड़ मुख्य रूप से रोहिणी सेक्टर 25, 28, 34, बवाना, नरेला, पश्चिमी यमुना नहर और दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन के किनारे प्रभावित होने वाले हैं.
कब तक बनकर तैयार होगा कॉरिडोर और कब चलेगी मेट्रो?
दिल्ली-एनसीआर के लोगों के मन में सबसे अहम सवाल यही है कि इस रूट पर मेट्रो सेवा कब तक शुरू होगी. विशेषज्ञों और डीएमआरसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वन विभाग से पेड़ों को हटाने और प्रत्यारोपण की अंतिम अनुमति मिलने के तुरंत बाद इस रूट पर सिविल कंस्ट्रक्शन, पिलर बनाने और स्टेशन निर्माण का काम पूरी रफ्तार पकड़ लेगा. इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया और शुरुआती काम पहले से ही पाइपलाइन में हैं.
आमतौर पर इस स्तर के एक बड़े और एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर के सिविल कंस्ट्रक्शन, ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग सिस्टम इंस्टॉल करने और ट्रायल रन को पूरा करने में लगभग 4 से 5 साल का समय लगता है. यदि वन विभाग से अगले कुछ महीनों में ग्रीन सिग्नल मिल जाता है और जमीन अधिग्रहण की कोई बड़ी बाधा सामने नहीं आती है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2030 के अंत तक या 2031 की शुरुआत में रिठाला-कुंडली कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ना शुरू हो जाएगी.
लाखों लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
भले ही इस कॉरिडोर को पूरी तरह शुरू होने में अभी कुछ सालों का वक्त लगेगा, लेकिन वन विभाग से अनुमति की यह प्रक्रिया इस प्रोजेक्ट की रफ्तार के लिए एक बेहद अहम और बड़ा कदम माना जा रहा है. इस मेट्रो रूट के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद रोहिणी, बवाना और नरेला जैसे सुदूर इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा. इसके साथ ही दिल्ली से हरियाणा के बीच आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों का सफर भी बेहद आसान और समय की बचत करने वाला हो जाएगा.
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