दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले करोड़ों यात्री रोजाना ठंडी-ठंडी एसी हवा, स्टेशनों की चमचमाती लाइटिंग और एस्केलेटर की सुविधाओं का आनंद लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मेट्रो में आप सफर करते हैं, उसे चलाने और उसके स्टेशनों को रोशन करने वाली करीब एक-तिहाई बिजली सीधे सूरज की रोशनी से आ रही है.
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प्रदूषण की मार झेल रही देश की राजधानी दिल्ली को साफ हवा देने के मकसद से दिल्ली मेट्रो अब सोलर एनर्जी के इस्तेमाल में एक नया इतिहास रचने जा रही है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC अपने 'फेज-4' प्रोजेक्ट के तहत एक ऐसा मेगा मास्टर प्लान लेकर आई है, जिससे मेट्रो स्टेशन अब खुद अपना मिनी पावर प्लांट बन जाएंगे. इस बड़े कदम से न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा होगी बल्कि मेट्रो प्रबंधन को करोड़ों रुपये की बचत भी होने वाली है.
बिजली की खपत और सौर ऊर्जा का बड़ा गणित
दिल्ली मेट्रो के पूरे ऑपरेशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सालाना करीब 1235 मिलियन यूनिट बिजली की बड़ी खपत होती है. हैरानी की बात यह है कि इस कुल खपत में से औसतन 22.22 प्रतिशत यानी लगभग 398 मिलियन यूनिट बिजली सीधे सौर ऊर्जा के जरिए हासिल की जा रही है.
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, दिन के समय जब सूरज पूरी तपिश पर होता है, तब दिल्ली मेट्रो के संचालन की करीब 60 प्रतिशत तक की बिजली जरूरत अकेले सोलर पावर पर निर्भर होती है. अगर सौर ऊर्जा के इस पूरे गणित को आंकड़ों के लिहाज से समझें, तो कुल सौर ऊर्जा में से 358 मिलियन यूनिट बिजली रीवा सोलर प्लांट से खरीदी जाती है, जबकि करीब 40 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन डीएमआरसी खुद अपने परिसरों के माध्यम से करती है.
फेज-4 के तहत स्टेशनों को मिनी पावर प्लांट में बदलने की तैयारी
ग्रीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ते हुए दिल्ली मेट्रो का अगला टारगेट बेहद चौंकाने वाला और बड़ा है. अपने फेज-4 प्रोजेक्ट के तहत डीएमआरसी कुल 59 एलिवेटेड स्टेशनों की छतों को मिनी पावर प्लांट में तब्दील करने जा रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ये सभी मेट्रो स्टेशन अपनी बिजली जरूरतों के लिए किसी बाहरी ग्रिड पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि खुद सौर ऊर्जा से बिजली जनरेट करेंगे. फेज-4 के तहत कुल 6 कॉरिडोर वाले 112 किलोमीटर लंबे नेटवर्क में इन एलिवेटेड स्टेशनों पर जैसे ही सोलर पैनल इंस्टॉल किए जाएंगे, वैसे ही डीएमआरसी की सौर ऊर्जा क्षमता में 6 से 7 मेगावाट का और अधिक इजाफा हो जाएगा.
मौजूदा नेटवर्क और भविष्य का रोडमैप
अगर दिल्ली मेट्रो के मौजूदा नेटवर्क की बात करें, तो मौजूदा समय में कुल 132 जगहों पर सोलर एनर्जी प्लांट पूरी तरह से एक्टिव हैं. इनके जरिए लगभग 53 मेगावाट बिजली का उत्पादन खुद डीएमआरसी द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अलग-अलग फेज के कुल 107 मेट्रो स्टेशन और डिपो परिसर शामिल हैं.
राहत की बात यह है कि फेज-3 और फेज-4 के प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर भी काम बहुत तेजी से चल रहा है. इसमें मौजपुर से मजलिस पार्क (मुकुंदपुर) कॉरिडोर को खोल भी दिया गया है और इसके सभी स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाने का काम पूरा हो चुका है. मेट्रो अधिकारियों का दावा है कि फेज-4 के पूरी तरह से संपन्न होने तक डीएमआरसी की अपनी सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़कर 60 मेगावाट के पार चली जाएगी.
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