दिल्ली मेट्रो आए दिन अपने किसी न किसी अजीबोगरीब वाकये और वायरल वीडियो की वजह से सुर्खियों में बनी रहती है. कभी मेट्रो के अंदर बनने वाली रील्स, कभी यात्रियों के बीच मारपीट, तो कभी सीट को लेकर होने वाले झगड़े सोशल मीडिया पर खूब तूल पकड़ते हैं. इसी कड़ी में अब इंटरनेट पर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर से 'मेट्रो इटिकेट्स' (Metro Etiquettes) और जेंडर आधारित बहसों को हवा दे दी. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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क्या है पूरा मामला?
रेडिट पर एक युवक ने अपना कड़वा अनुभव साझा करते हुए 'मैं अब इंसान नहीं रहा' (I am no longer human) शीर्षक से एक पोस्ट लिखा. यूजर के मुताबिक, वह मेट्रो में सफर के दौरान अपनी सामान्य सीट पर बैठकर शांति से ईयरफोन लगाकर गाने सुन रहा था. तभी वहां दो युवतियां आईं और उसने बैठने के लिए सीट छोड़ने की मांग की. चूंकि वह सीट महिलाओं या बुजुर्गों के लिए आरक्षित (Reserved) नहीं थी, बल्कि एक सामान्य सीट थी, इसलिए युवक ने सीट देने से साफ इनकार कर दिया. युवक के इस इनकार से दोनों युवतियां काफी नाराज हो गईं.
युवक का तर्क और महिलाओं की प्रतिक्रिया
घटना के बाद युवक ने अपनी सफाई में बताया कि वह हमेशा इस बात का ध्यान रखता है कि वह कभी भी किसी आरक्षित सीट पर न बैठे, और हमेशा सामान्य सीटों का ही इस्तेमाल करें. लेकिन जब उसने सीट खाली करने से मना किया, तो उन महिलाओं ने उस पर तंज कसना शुरू कर दिया. उन्होंने युवक को ताना मारते हुए कहा कि 'इंसानियत नाम की भी कोई चीज होती है और जरूरत पड़ने पर सीट छोड़ देनी चाहिए.'
दूसरी तरफ, युवक का अपना पक्ष था. उसका तर्क था कि जब दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों जैसे विशेष वर्ग के लोगों के लिए पहले से ही अलग से सीटें आरक्षित कर रखी हैं, तो सामान्य सीटों पर सफर कर रहे अन्य यात्रियों को बार-बार उठने के लिए क्यों मजबूर किया जाए?
युवक ने यह भी स्पष्ट किया कि वे दोनों युवतियां न तो बुजुर्ग थीं और न ही गर्भवती, बल्कि उसकी तरह ही कॉलेज जाने वाली सामान्य छात्राएं थीं. इसके अलावा, उसकी खुद की यात्रा लंबी थी और काफी देर तक खड़े रहने के बाद उसे वह सीट मिली थी, जिस वजह से उसने सीट छोड़ने से इनकार कर दिया था.
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
इस घटना के सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं. इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. इस पूरी घटना के बाद युवक ने सोशल मीडिया पर एक गंभीर सवाल उठाया है कि क्या समाज में लड़कों को इतना मजबूत और 'पत्थर दिल' मान लिया गया है कि वे कभी थक नहीं सकते?
फिलहाल, इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर से यह बहस छेड़ दी है कि क्या सामान्य सीटों पर बैठे युवकों को शिष्टाचार के नाते अपनी सीट छोड़ देनी चाहिए या फिर बनाए गए नियमों और रिजर्वेशन के दायरे का ही पालन करना चाहिए?
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