दिल्ली में समर्सिबल चलाने वालों की बढ़ेगी मुश्किल! सरकार बदलने जा रही है पूराना नियम

वैशाली

• 06:25 PM • 12 Jul 2026

Delhi Borewell Rules: दिल्ली में समर्सिबल पंप और बोरवेल इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है. सरकार ऐसी नई नीति ला रही है, जिसके लागू होते ही हर बोरवेल पर वाटर मीटर लगाना जरूरी होगा. आखिर क्यों लिया जा रहा यह फैसला और किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर, जानिए पूरी खबर.

दिल्ली में बोरवेल ने नए नियम होंगे लागू! (प्रतीकात्मक तस्वीर)
दिल्ली में बोरवेल ने नए नियम होंगे लागू! (प्रतीकात्मक तस्वीर)(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Delhi Samarsibal Pump Rule: देश की राजधानी दिल्ली में रहने वाले और अपने घरों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में समर्सिबल पंप अथवा बोरवेल लगवाने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. दिल्ली सरकार अब एक ऐसा नया कानून लाने की तैयारी में है, जिसके प्रभावी होने के बाद जमीन के नीचे से पानी निकालना पूरी तरह मुफ्त नहीं रहेगा. राजधानी में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध भूजल दोहन पर लगाम कसने के उद्देश्य से एक नई ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की गई है. इस नीति के अमलीजामा पहनते ही दिल्ली के हर घरेलू और कमर्शियल बोरवेल पर वाटर मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया जाएगा.

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क्यों पड़ी इस कड़े कानून की जरूरत?

दिल्ली में साल 2010 से चली आ रही मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक, कोई भी आवेदक मात्र ₹500 की वन-टाइम प्रोसेसिंग फीस जमा कर बोरवेल की प्रशासनिक मंजूरी हासिल कर लेता है. परंतु इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लूपहोल यह है कि एक बार मंजूरी मिलने के बाद इस बात की कोई मॉनिटरिंग नहीं होती कि उस बोरवेल के जरिए रोजाना कितने लीटर पानी जमीन से खींचा जा रहा है. इसी खामी को दूर करने के लिए सरकार यह नया नियम ला रही है, जिसके तहत सामान्य पानी के बिल की तरह ही अब बोरवेल से निकलने वाले पानी पर भी अनिवार्य मीटर और लगातार लगने वाले यूजर चार्ज का प्रावधान किया गया है.

कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य केवल एक बार मंजूरी देने के बजाय लगातार पानी के दोहन की निगरानी करना है. सीधे शब्दों में कहें तो हर बोरवेल पर वाटर मीटर इंस्टॉल होगा और जमीन के भीतर से खींचे गए पानी की मात्रा के आधार पर बाकायदा मासिक बिल जारी किया जाएगा, जिसका भुगतान उपभोक्ता को करना होगा. हालांकि, सरकार ने अभी इसके लिए कोई अंतिम दरें (टैरिफ) तय नहीं की हैं. ड्राफ्ट पॉलिसी को सुझावों और रेट निर्धारण के लिए फिलहाल सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) और पर्यावरण विभाग के पास भेजा गया है.

लाखों अवैध बोरवेलों पर कड़ा एक्शन, घर-घर जाकर होगा सर्वे

दिल्ली प्रशासन के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती चोरी-छिपे चल रहे अवैध बोरवेल हैं. अधिकारियों द्वारा पूर्व में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सूचित किया गया था कि राजधानी में करीब 15,962 अवैध बोरवेलों को सील किया जा चुका है. हालांकि विभाग का मानना है कि असल संख्या इससे कहीं अधिक है, जो लाखों में हो सकती है. चूंकि ये बोरवेल घरों के अंदर छिपे होते हैं, इसलिए इनकी पहचान के लिए सरकार अब बड़े पैमाने पर घर-घर जाकर सर्वे करने की योजना बना रही है.

अवैध बोरवेल चलाने वालों को एक मौका

इस कड़े कानून के बीच राहत की बात यह है कि वर्तमान में संचालित हो रहे अवैध बोरवेलों को सीधे बंद करने के बजाय उन्हें वैध (रेगुलर) करवाने का एक मौका दिया जाएगा. इसके लिए शर्त केवल इतनी होगी कि मकान मालिक को अपने बोरवेल पर वाटर मीटर लगवाने के लिए तैयार होना होगा. ध्यान रहे कि नए बोरवेल की मंजूरी केवल उन्हीं चुनिंदा क्षेत्रों में दी जाती है, जहां का भूजल स्तर गंभीर या क्रिटिकल श्रेणी में नहीं आता है.

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