देश की राजधानी दिल्ली को नया उपराज्यपाल (LG) मिल गया है. पूर्व राजनयिक और दिग्गज आईएफएस (IFS) अधिकारी तरणजीत सिंह संधू अब दिल्ली के राजनिवास की कमान संभालेंगे. केंद्र सरकार द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत संधू को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. विनय कुमार सक्सेना के स्थान पर आ रहे संधू के सामने दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच समन्वय बैठाने की बड़ी चुनौती होगी.
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अमेरिका में भारत का परचम लहराने वाले डिप्लोमेट
1988 बैच के आईएफएस अधिकारी तरणजीत सिंह संधू को अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है. उन्होंने फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक अमेरिका में भारत के 28वें राजदूत के रूप में सेवाएं दीं. उनके कार्यकाल के दौरान ही प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक अमेरिका यात्राओं की नींव रखी गई और डोनाल्ड ट्रंप से लेकर जो बाइडेन प्रशासन तक भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया गया.
यूक्रेन से श्रीलंका तक का अनुभव
संधू के करियर की शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही. उन्होंने यूक्रेन में भारतीय दूतावास खोलने और वहां प्रशासनिक विंग की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी. इसके अलावा, वह श्रीलंका में उच्चायुक्त और संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थाई मिशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
दिल्ली से है गहरा नाता
तरणजीत सिंह संधू की शिक्षा दिल्ली में ही हुई है. उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स किया और फिर जेएनयू (JNU) से इंटरनेशनल रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. उनकी पत्नी रीनत संधू भी एक रिटायर्ड राजदूत हैं, जो इटली और नीदरलैंड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
राजनीतिक पारी और नई चुनौतियां
रिटायरमेंट के बाद संधू ने राजनीति में कदम रखा और साल 2024 में अमृतसर सीट से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें वहां हार का सामना करना पड़ा. अब दिल्ली के एलजी के रूप में उनकी नियुक्ति को एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. कूटनीतिक अनुभव से लैस संधू के लिए दिल्ली के प्रशासनिक फेरबदल और सरकार के साथ खींचतान को संभालना सबसे बड़ी परीक्षा होगी.
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