देश की राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने प्रशासन और फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे में हुई मौतों के बाद अब स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. लोगों का सीधा आरोप है कि फायर ब्रिगेड का 'सिस्टम फेलियर' ही इस त्रासदी का सबसे बड़ा कारण बना.
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हाइड्रोलिक मशीन में तकनीकी खराबी और लापरवाही का आरोप
हादसे के वक्त मौके पर मौजूद चश्मदीद महेश शर्मा ने बताया कि आग सुबह करीब 6:30 बजे लगी थी. सूचना देने के करीब 20-30 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की पहली गाड़ी पहुंची, लेकिन उसमें सीढ़ी ही नहीं थी. इसके बाद जब हाइड्रोलिक मशीन को बुलाया गया, तो वह मौके पर पहुंचने के बावजूद आधे घंटे तक खुली ही नहीं. चश्मदीदों का दावा है कि मशीन में तकनीकी खराबी थी, और जब तक दूसरी हाइड्रोलिक मशीन आई (जिसमें 40 मिनट लग गए), तब तक आग पूरी बिल्डिंग में फैल चुकी थी.
"हम बचा सकते थे लोगों को, लेकिन विशेषज्ञों ने मना किया"
पड़ोसियों का दर्द है कि बालकनी में फंसे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे. स्थानीय लोग उन्हें नीचे कूदने के लिए कह रहे थे और गद्दे बिछाने की तैयारी में थे, लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम ने 'एक्सपर्ट' होने का हवाला देकर उन्हें रोक दिया. लोगों का आरोप है कि टीम ने नीचे का शटर तोड़ दिया, जिससे हवा मिलते ही आग और भड़क गई और ऊपर फंसे लोगों का दम घुटने लगा. हालांकि, स्थानीय लोगों ने अपनी हिम्मत से एक डेढ़ साल के बच्चे और दो अन्य बच्चों को सुरक्षित जंप करवाकर बचा लिया.
प्रशासन की चुप्पी और जांच का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम पर जब फायर अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने फिलहाल किसी भी जानकारी से इनकार करते हुए जांच की बात कही है. लेकिन यह सवाल हवा में तैर रहा है कि करोड़ों की हाइड्रोलिक मशीनें एन वक्त पर क्यों जवाब दे जाती हैं और क्या प्रशासन की इस कथित लापरवाही की कीमत मासूम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी?
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