दिल्ली के राशन दुकानदारों (Fair Price Shop Licensees) के सामने एक बार फिर रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए नए गजट नोटिफिकेशन 2026 के एक नियम को लेकर राजधानी के सैकड़ों बुजुर्ग राशन डीलरों में भारी नाराजगी और परेशानी देखी जा रही है.
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क्या है नया नियम?
दिल्ली सरकार के नए गजट नोटिफिकेशन 2026 में प्रावधान किया गया है कि राशन दुकान के लाइसेंस धारक की उम्र 70 साल पूरी होते ही उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा.
दिल्ली सरकारी राशन डीलर संघ के अनुसार, इस नियम के लागू होने से दिल्ली के सैकड़ों वरिष्ठ राशन दुकानदारों के लाइसेंस छीन जाएंगे, जिससे उनके और उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा.
केशवपुरम में महापंचायत, बीजेपी सांसद पहुंचे
इस फैसले के खिलाफ और अपनी समस्याओं को लेकर राशन दुकानदारों ने दिल्ली के केशवपुरम में एक बड़ी बैठक का आयोजन किया.
- जनप्रतिनिधि का समर्थन: इस बैठक में बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया भी शामिल हुए. उन्होंने दुकानदारों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि वह इस संवेदनशील मुद्दे को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और खाद्य मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के समक्ष मजबूती से उठाएंगे.
- कोर्ट जाने की चेतावनी: दिल्ली सरकारी राशन डीलर संघ के अध्यक्ष शिव कुमार गर्ग ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार से बातचीत के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिलती है, तो वे इस फैसले के खिलाफ अदालत (कानून) का दरवाजा खटखटाएंगे.
कोरोना वॉरियर्स की अनदेखी का आरोप
राशन डीलर संघ ने नाराजगी जताते हुए याद दिलाया कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में दिल्ली के करीब 2,000 राशन डीलरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जनता तक राशन पहुंचाया था. उस दौर में 20 से अधिक राशन दुकानदारों की कोरोना से असमय मृत्यु भी हो गई थी.
दुकानदारों का कहना है कि जिस उम्र में उन्हें सम्मान और राहत मिलनी चाहिए, उस उम्र में सरकार सीमा तय करके उनके साथ अन्याय कर रही है.
राशन सप्लाई और मार्जिन मनी भी अटकी
बैठक में राशन डीलरों ने सप्लाई और पेमेंट से जुड़ी कई अन्य प्रशासनिक कमियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया:
- अधूरी राशन सप्लाई: सरकार ने अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीनों का राशन एक साथ बांटने का निर्देश दिया था, लेकिन कई दुकानों पर 2 महीने का भी राशन पूरा नहीं पहुंचा है.
- बकाया कमीशन: कई महीनों से राशन दुकानदारों का कमीशन और मार्जिन मनी अटका हुआ है, जिससे उनका दैनिक खर्च चलाना कठिन हो रहा है.
अब देखना होगा कि इस विरोध प्रदर्शन और मांग के बाद दिल्ली सरकार और संबंधित मंत्रालय इस फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं.
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