Delhi PG Reality Check: 15 हजार में 1 बेड, न वेंटिलेशन, न सेफ्टी... सत्यनिकेतन इलाके में कैसे घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं छात्र, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

मौसमी सिंह

• 01:50 PM • 08 Sep 2026

Delhi Pg Reality Check: दिल्ली के सत्यनिकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने के बाद जब रियलिटी चेक किया गया तो PG की खौफनाक सच्चाई सामने आई. जर्जर दीवारों, लटकते बिजली के तारों और बिना वेंटिलेशन के कमरों में DU के छात्र रहने को मजबूर हैं. 15 से 25 हजार रुपये किराया वसूलने के बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं.

सत्यनिकेतन में इमारत गिरने के बाद ग्राउंड रिपोर्ट
सत्यनिकेतन में इमारत गिरने के बाद ग्राउंड रिपोर्ट
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Satyaniketan Building Collapse News: राजधानी दिल्ली के साउथ कैंपस से सटे सत्यनिकेतन इलाके में हाल ही में एक पांच मंजिला जर्जर इमारत ढहने से हड़कंप मच गया था. इस हादसे के बाद जब ग्राउंड जीरो पर जाकर आसपास की इमारतों का रियलिटी चेक किया गया, तो हैरान करने वाली और डरावनी तस्वीर सामने आई. दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के हजारों छात्र हॉस्टल की कमी के कारण मजबूरी में इन जर्जर, असुरक्षित और बदहाल प्राइवेट पीजी (PG) में भारी-भरकम किराया चुकाकर रहने को मजबूर हैं.

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15 हजार में एक बेड और 25 हजार का कमरा

सत्यनिकेतन की बिल्डिंग नंबर 110 और 111 में किए गए रियलिटी चेक के दौरान देखा गया कि एक छोटे से कमरे या फ्लैट का किराया 15,000 रुपये प्रति बेड से लेकर 25,000 रुपये तक वसूला जा रहा है. इतने भारी किराए के बावजूद कमरों में वेंटिलेशन का कोई इंतजाम नहीं है. कमरे में न तो खिड़कियां ठीक से खुलती हैं और न ही किचन में एग्जॉस्ट फैन लगा है. बिना एसी के कमरों में इस कदर घुटन होती है कि कुछ मिनट रुकना भी मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा बिजली का अलग से भारी-भरकम बिल भी छात्रों से वसूला जाता है.

लटकते बिजली के तार, टूटी बीम और संकरा रास्ता

इमारत के प्रवेश द्वार पर दर्जनों बिजली के मीटर और खुले तारों का मकरजाल फैला हुआ है, जिससे हर पल शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है. बीम ऊपर से नीचे तक क्रैक हो चुकी हैं और सीलिंग का प्लास्टर गिर रहा है, जिससे जंग लगा लोहे का सरिया साफ दिखाई दे रहा है. सबसे खतरनाक बात यह है कि दो पांच मंजिला इमारतों के बाहर निकलने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है, जहां गाड़ियां खड़ी रहने पर दो लोगों का एक साथ निकलना भी नामुमकिन है. यदि कोई आग लगने या आपात स्थिति जैसा हादसा होता है तो छात्रों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं है.

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PG संचालकों की मनमानी पर प्रशासन खामोश

दिल्ली विश्वविद्यालय में दूर-दराज से आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. छात्रों का कहना है कि उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है, इसलिए वे अपनी जान जोखिम में डालकर यहां रहने को विवश हैं. पीजी संचालक बिना किसी सुरक्षा मानक और नगर निगम (MCD) के नियमों का पालन किए बेखौफ तरीके से अपना धंधा चला रहे हैं. हर महीने मोटी रकम वसूलने के बावजूद छात्रों को भेड़-बकरियों की तरह कमरों में ठूंसा जा रहा है और प्रशासन सब कुछ जानकर भी मौन बना हुआ है.

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